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अमरनाथ की आरती के बोल और महत्व

अमरनाथ की आरती के बोल, महत्व और चरणबद्ध विधि

By Sanatan Hindu2 min readUpdated 9 August 2026Audio available
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Amarnath Ki Aarti Lyrics and Significance

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Saturday, 6 March 2027· in 206 days

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परिचय

अमरनाथ की आरती भगवान शिव को समर्पित एक पवित्र स्तुति है, जो अमरनाथ मंदिर के मुख्य देवता हैं। यह आरती ईश्वर के प्रति भक्ति, कृतज्ञता और समर्पण की एक सुंदर अभिव्यक्ति है। यह अमरनाथ मंदिर की दैनिक पूजा पद्धति का एक अनिवार्य अंग है और पवित्र यात्रा के दौरान भक्तों द्वारा भी इसका पाठ किया जाता है। यह आरती भगवान शिव की अलौकिक शक्ति तथा आत्म-समर्पण और भक्ति के महत्व का मर्मस्पर्शी स्मरण कराती है। इस लेख में, हम अमरनाथ की आरती के बोल, महत्व और इसे करने की चरणबद्ध विधि के बारे में विस्तार से जानेंगे। कश्मीर की रमणीय घाटी में स्थित अमरनाथ मंदिर हिंदू धर्म के सबसे पूजनीय स्थलों में से एक है, जो हर साल लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। यह मंदिर अपने प्राकृतिक हिमलिंग के लिए प्रसिद्ध है, जिसे भगवान शिव की दिव्य शक्ति का प्रतीक माना जाता है। यह आरती ईश्वर से जुड़ने और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने का एक सशक्त माध्यम है। यह आध्यात्मिक उन्नति, आत्म-चिंतन और अंतरावलोकन के लिए एक शक्तिशाली साधन है।

महत्व

हिंदू धर्म में अमरनाथ की आरती का अत्यधिक महत्व है, क्योंकि यह भगवान शिव के प्रति भक्ति, कृतज्ञता और आत्म-समर्पण की एक सुंदर अभिव्यक्ति है। मान्यता है कि इस आरती में मन, शरीर और आत्मा को शुद्ध करने तथा भक्त को ईश्वर के समीप ले जाने की शक्ति होती है। ऐसा भी माना जाता है कि इसमें मनोकामनाएं पूर्ण करने, सौभाग्य लाने और भक्त की संकटों से रक्षा करने की सामर्थ्य है। यह आरती अमरनाथ मंदिर की दैनिक पूजा पद्धति का अभिन्न अंग है और पवित्र यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा भी इसका गायन किया जाता है।

आरती का सर्वोत्तम समय

अमरनाथ की आरती करने का सबसे शुभ समय प्रातःकाल (प्राथमिकता से सूर्योदय के समय) या संध्याकाल (प्राथमिकता से सूर्यास्त के समय) होता है। इसके अलावा, शिवरात्रि, सोमवार और अमरनाथ यात्रा जैसे विशेष अवसरों पर यह आरती करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

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आरती कैसे करें

  1. 1अमरनाथ की आरती के बोल के साथ शुरुआत करें
  2. 2भगवान शिव की प्रार्थना करें और उन्हें प्रणाम करें
  3. 3भगवान शिव से आशीर्वाद और क्षमा याचना करें
  4. 4पूर्ण भक्ति और निष्ठा के साथ आरती का पाठ करें
  5. 5अंतिम पद का पाठ करके और भगवान शिव से आशीर्वाद मांगकर आरती का समापन करें

मंत्र

Amarnath Ki Aarti

जय जय शिवशंभू, जय जय शिवशंभू, जय जय शिवशंभू, जय जय शिवशंभू

Jai Jai Shivshambhu, Jai Jai Shivshambhu, Jai Jai Shivshambhu, Jai Jai Shivshambhu

अर्थ: Victory to Lord Shiva, the benevolent one

Amarnath Ki Aarti

जय जय शिवशंभू, तुम्हारी महिमा अपरम्पार, जय जय शिवशंभू, तुम्हारी महिमा अपरम्पार

Jai Jai Shivshambhu, Tumhari Mahima Aparampar, Jai Jai Shivshambhu, Tumhari Mahima Aparampar

अर्थ: Victory to Lord Shiva, your glory is immeasurable

Amarnath Ki Aarti

जय जय शिवशंभू, तुम्हारी कृपा से हमारे पाप धुल जाते हैं, जय जय शिवशंभू, तुम्हारी कृपा से हमारे पाप धुल जाते हैं

Jai Jai Shivshambhu, Tumhari Kripa Se Hamare Paap Dhul Jate Hain, Jai Jai Shivshambhu, Tumhari Kripa Se Hamare Paap Dhul Jate Hain

अर्थ: Victory to Lord Shiva, by your grace our sins are washed away

करें

  • पूर्ण भक्ति और निष्ठा के साथ आरती का पाठ करें
  • भगवान शिव की प्रार्थना और वंदना करें
  • भगवान शिव से आशीर्वाद और क्षमा मांगें
  • सात्विक एवं शाकाहारी आहार का पालन करें

न करें

  • उचित तैयारी और पवित्रता के बिना आरती का पाठ न करें
  • भगवान शिव को मांसाहार या नशीले पदार्थ अर्पित न करें
  • अशांत या विचलित मन से आरती का पाठ न करें

सामान्य गलतियाँ

  • बिना उचित तैयारी और पवित्रता के आरती पढ़ना
  • भगवान शिव को मांसाहारी भोजन या नशीले पदार्थ अर्पित करना
  • विचलित मन से आरती का पाठ करना

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमरनाथ की आरती का क्या महत्व है?
अमरनाथ की आरती भगवान शिव को समर्पित एक पवित्र स्तुति है, और हिंदू धर्म में इसका अत्यधिक महत्व है। मान्यता है कि इसमें मन, शरीर और आत्मा को शुद्ध करने तथा भक्त को ईश्वर के समीप लाने की शक्ति होती है।
अमरनाथ की आरती करने का सबसे उत्तम समय कौन सा है?
अमरनाथ की आरती करने का सबसे उत्तम समय प्रातःकाल (अधिमानतः सूर्योदय के समय) या संध्याकाल (अधिमानतः सूर्यास्त के समय) होता है।

संदर्भ और पारंपरिक टिप्पणियाँ

  • अमरनाथ की आरती का उल्लेख शिव पुराण और महाभारत सहित विभिन्न हिंदू शास्त्रों और ग्रंथों में मिलता है
  • यह आरती कश्मीरी लोक कथाओं और हिंदू पौराणिक कथाओं सहित विभिन्न पारंपरिक और सांस्कृतिक ग्रंथों में भी वर्णित है

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