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भीष्म अष्टमी — भीष्म पितामह का प्रयाण दिवस

भीष्म अष्टमी: भीष्म पितामह के देहावसान को नमन

By Sanatan Hindu2 min readUpdated 9 August 2026Audio available
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Bhishma Ashtami — Bhishma Pitamah's Departure Day

परिचय

भीष्म अष्टमी हिंदू पंचांग में एक अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है, जो महाभारत के पूजनीय पात्र भीष्म पितामह के देहावसान (प्रयाण) की स्मृति में मनाया जाता है। यह माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है, जो आमतौर पर जनवरी या फरवरी में आती है। भीष्म पितामह, जिन्हें भीष्म के नाम से भी जाना जाता है, एक शक्तिशाली और बुद्धिमान योद्धा थे जिन्होंने कुरुक्षेत्र के युद्ध में एक मुख्य भूमिका निभाई थी। उनका प्रयाण एक युग के अंत और एक नए चक्र की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। भीष्म अष्टमी पर, भक्त भीष्म पितामह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनका आशीर्वाद तथा मार्गदर्शन मांगते हैं। यह दिन शनि ग्रह (शनि देव) से भी संबंधित है और अनुष्ठान करने तथा क्षमा याचना के लिए शुभ माना जाता है। भीष्म अष्टमी चिंतन, आत्म-निरीक्षण और आध्यात्मिक उन्नति का दिन है, जो हमें जीवन की क्षणभंगुरता और एक धर्मपरायण तथा अर्थपूर्ण जीवन जीने के महत्व का स्मरण कराता है।

महत्व

भीष्म अष्टमी का विशेष महत्व है क्योंकि यह ज्ञान, साहस और भक्ति के प्रतीक भीष्म पितामह के जीवन और उनकी विरासत का सम्मान करती है। यह दिन शनि ग्रह से भी जुड़ा हुआ है, जिसका मानव जीवन पर गहरा प्रभाव माना जाता है। भीष्म अष्टमी का पालन करके, भक्त अपनी पुरानी गलतियों के लिए क्षमा मांग सकते हैं, अपने कर्मों पर विचार कर सकते हैं और आत्म-सुधार की दिशा में प्रयास कर सकते हैं। यह दिन अनुष्ठान करने और भीष्म पितामह का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए भी शुभ माना जाता है, जिन्हें एक रक्षक देव और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है।

कब मनाएं

भीष्म अष्टमी माघ माह की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है, जो सामान्यतः जनवरी या फरवरी में आती है। पूजा और अनुष्ठान करने का सर्वोत्तम समय सुबह सूर्योदय के समय या शाम को सूर्यास्त के समय होता है। भीष्म अष्टमी की सटीक तिथि और शुभ मुहूर्त जानने के लिए हिंदू पंचांग या किसी विद्वान पंडित से परामर्श करना आवश्यक है।

अपना सटीक शुभ समय जानें अपने शहर और तिथि के लिए शुभ मुहूर्त और चौघड़िया देखें।

आवश्यक सामग्री

भीष्म पितामह का चित्र या मूर्ति
अगरबत्ती / धूप
कपूर
पुष्प (फूल)
फल
तिल (काले एवं सफेद)
जल
दूध
शहद

तैयारी कैसे करें

  1. 1पूजा स्थल को स्वच्छ और पवित्र करें
  2. 2भीष्म पितामह का चित्र या मूर्ति स्थापित करें
  3. 3धूप, अगरबत्ती और कपूर जलाएं
  4. 4फूल, फल और तिल अर्पित करें
  5. 5अभिषेक अनुष्ठान के लिए जल, दूध और शहद का मिश्रण तैयार करें

कैसे मनाएं

  1. 1भीष्म पितामह का ध्यान और आह्वान करके अनुष्ठान का प्रारंभ करें
  2. 2चित्र या मूर्ति पर फूल, फल और तिल अर्पित करें
  3. 3जल, दूध और शहद के मिश्रण से मूर्ति या चित्र का अभिषेक करें
  4. 4भीष्म अष्टमी मंत्र का पाठ करें और आरती उतारें
  5. 5अतीत की भूलों के लिए क्षमा मांगें और अपने कर्मों पर आत्म-चिंतन करें
  6. 6भीष्म पितामह के मार्गदर्शन और आशीर्वाद के लिए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें

मंत्र

Bhishma Ashtami Mantra

श्री भीष्म अष्टमी मंत्रः

Shri Bhishma Ashtami Mantrah

अर्थ: Salutations to Bhishma Pitamah on his departure day

Bhishma Stuti

भीष्मस्तुति

Bhishma Stuti

अर्थ: Hymn of praise to Bhishma Pitamah

पालन के नियम

  • भीष्म अष्टमी पर पूर्ण उपवास या फलाहार का पालन करें
  • तामसिक भोजन (मांसाहार) और मादक पदार्थों से दूर रहें
  • ध्यान, प्रार्थना और आत्म-चिंतन जैसी आध्यात्मिक गतिविधियों में समय बिताएं

करें

  • भीष्म पितामह का आशीर्वाद प्राप्त करें
  • अभिषेक अनुष्ठान करें और फूल, फल तथा तिल अर्पित करें
  • भीष्म अष्टमी मंत्र का जाप करें और आरती करें

न करें

  • भीष्म अष्टमी के दिन किसी भी प्रकार के वाद-विवाद और झगड़ों से बचें
  • सांसारिक गतिविधियों और अत्यधिक भौतिक इच्छाओं में लीन होने से बचें
  • भीष्म अष्टमी से जुड़े अनुष्ठानों और परंपराओं की उपेक्षा न करें

सामान्य गलतियाँ

  • भीष्म अष्टमी और इससे जुड़े अनुष्ठानों के महत्व को नज़रअंदाज़ करना
  • भीष्म पितामह का आशीर्वाद लेना भूल जाना
  • व्रत के नियमों और संयम का सही से पालन न करना

क्षेत्रीय विविधताएँ

  • कुछ क्षेत्रों में भीष्म अष्टमी बड़े उत्साह और भव्यता के साथ मनाई जाती है
  • अन्य क्षेत्रों में यह दिन सादगी और नम्रता के साथ मनाया जाता है
  • भारत के विभिन्न हिस्सों में भीष्म अष्टमी से जुड़ी विविध परंपराएं और रीति-रिवाज प्रचलित हैं

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भीष्म अष्टमी का क्या महत्व है?
भीष्म अष्टमी भीष्म पितामह के देहावसान (प्रयाण) की स्मृति में मनाई जाती है और यह शनि ग्रह से भी जुड़ी है। यह दिन चिंतन, आत्म-निरीक्षण और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर है।
मैं भीष्म अष्टमी की पूजा और व्रत कैसे करूँ?
इस दिन व्रत या फलाहार रखें, अभिषेक अनुष्ठान करें, भीष्म अष्टमी मंत्र का पाठ करें और भीष्म पितामह का आशीर्वाद प्राप्त करें।

संदर्भ और पारंपरिक टिप्पणियाँ

  • महाभारत
  • श्रीमद्भागवत पुराण
  • विष्णु पुराण

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