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24 एकादशी व्रतों की तिथियों और विधि सहित संपूर्ण सूची

24 एकादशी व्रतों, उनके महत्व और तिथियों एवं विस्तृत विधि के साथ उन्हें करने के नियम जानें।

By Sanatan Hindu1 min readUpdated 27 August 2026Audio available
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Complete List of 24 Ekadashi Vrats with Dates and Vidhi

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परिचय

सनातन धर्म में एकादशी एक अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि है जो माह में दो बार, शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को आती है। एकादशी व्रत करने से आध्यात्मिक उन्नति, शांति और समृद्धि की प्राप्ति मानी जाती है। एक वर्ष में 24 एकादशी व्रत होते हैं, और प्रत्येक का अपना विशेष महत्व और कथा होती है। इस लेख में हम एकादशी व्रतों के महत्व, उनके करने के शुभ समय और चरणबद्ध विधि के बारे में विस्तार से जानेंगे।

महत्व

एकादशी व्रत का विशेष महत्व है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि यह साधक को आत्मिक ज्ञान प्राप्त करने, पापों से मुक्ति पाने और सौभाग्य प्राप्त करने में सहायक होता है। प्रत्येक एकादशी व्रत की एक अनूठी कथा और महत्व है, जो इसे हिंदू धर्म का एक अभिन्न अंग बनाते हैं।

करने का सर्वोत्तम समय

एकादशी व्रत करने का सर्वोत्तम समय शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि होती है। यह व्रत सूर्योदय से प्रारंभ होकर अगले दिन सूर्योदय पर समाप्त होता है।

अपना सटीक शुभ समय जानें अपने शहर और तिथि के लिए शुभ मुहूर्त और चौघड़िया देखें।

आवश्यक सामग्री

जल
दूध
घी
फल
सब्जियां
अनाज
पूजा सामग्री जैसे अगरबत्ती, कपूर और पुष्प

तैयारी के चरण

  1. 1प्रातःकाल जल्दी उठें
  2. 2स्नान करें
  3. 3स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  4. 4पूजा स्थल तैयार करें
  5. 5सभी आवश्यक सामग्री एकत्रित करें

चरण-दर-चरण विधि

  1. 1प्रातः जल्दी उठकर और स्नान करके व्रत का संकल्प लें
  2. 2स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल तैयार करें
  3. 3भगवान विष्णु की पूजा करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें
  4. 4आवश्यक सामग्री के साथ विधिवत पूजा संपन्न करें
  5. 5एकादशी व्रत मंत्रों का जाप करें और व्रत कथा सुनें
  6. 6उपवास रखें या केवल फल और सात्विक आहार ग्रहण करें
  7. 7अगले दिन पूजन और भोजन ग्रहण कर व्रत का पारण करें

मंत्र

Ekadashi Vrat Mantra

एकादशी स्तु मे जो तुम्हें देक्षीते

Ekadashi siddhu mei jo tumhen dekhite

अर्थ: I am observing the Ekadashi Vrat, please bless me

Om Namo Narayanaya

एकादशी व्त् पुन्यहअ

Om Namo Narayanaya

अर्थ: Salutations to Lord Narayana

व्रत के नियम

  • प्रातःकाल जल्दी उठें
  • स्नान करें
  • स्वच्छ वस्त्र पहनें
  • उपवास रखें या केवल फल और सब्जियां ग्रहण करें
  • अन्न या अनाज का सेवन न करें
  • मदिरा और मांसाहार का सेवन न करें
  • किसी भी प्रकार की हिंसक या अनुचित गतिविधियों में लिप्त न हों

करें

  • सच्ची निष्ठा और भक्तिभाव से व्रत का पालन करें
  • आवश्यक सामग्री के साथ विधिवत पूजा करें
  • एकादशी व्रत मंत्रों का जाप करें और कथा सुनें
  • दूसरों की सहायता करें और दान-पुण्य के कार्यों में भाग लें

न करें

  • बिना पूजा और पारण विधि किए व्रत न खोलें
  • मांसाहारी भोजन अथवा मदिरा का सेवन न करें
  • किसी भी प्रकार की हिंसक या हानिकारक गतिविधियों में संलग्न न हों
  • व्रत रखने वाले अन्य लोगों को किसी प्रकार से परेशान न करें

सामान्य गलतियाँ

  • प्रातःकाल जल्दी न उठना
  • स्नान न करना
  • स्वच्छ वस्त्र न पहनना
  • उचित सामग्री के साथ पूजा न करना
  • बिना पूजा किए व्रत खोलना

क्षेत्रीय विविधताएँ

  • कुछ क्षेत्रों में एकादशी व्रत के नियमों का पालन दशमी तिथि से ही प्रारंभ हो जाता है
  • कुछ क्षेत्रों में व्रत का पालन दो दिनों तक किया जाता है
  • कुछ क्षेत्रों में यह व्रत विभिन्न स्थानीय नियमों और रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एकादशी व्रत का क्या महत्व है?
एकादशी व्रत का विशेष महत्व है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि यह साधक को आध्यात्मिक ज्ञान और जागृति प्रदान करता है, पापों का नाश करता है और सुख-सौभाग्य लाता है।
एकादशी व्रत का पालन कैसे करें?
एकादशी व्रत रखने के लिए प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें, पूजा स्थल तैयार करें और आवश्यक सामग्री के साथ पूजा करें। उपवास या फलाहार करें, एकादशी व्रत मंत्रों का जाप करें और व्रत कथा का श्रवण करें।

संदर्भ और पारंपरिक टिप्पणियाँ

  • एकादशी व्रत का उल्लेख भागवत पुराण और विष्णु पुराण जैसे प्राचीन हिंदू धर्मग्रंथों में मिलता है
  • यह व्रत विश्व भर में करोड़ों हिंदुओं द्वारा श्रद्धापूर्वक रखा जाता है
  • ऐसी मान्यता है कि इस व्रत का पालन भगवान श्री राम और भगवान श्री कृष्ण ने भी किया था

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