Om Jai Shiv Omkara - Aarti
Complete lyrics with original text, transliteration, and meaning, 9 sections
Om Jai Shiv Omkara - Shiv Aarti
Original
जय शिव ओंकारा, प्रभु, जय शिव ओंकारा ब्रह्मा, विष्णु सदा शिव ब्रह्मा, विष्णु सदा शिव, अर्द्धांगी धारा ॐ हर, हर, हर, महादेव
(जय शिव ओंकारा, प्रभु, जय शिव ओंकारा)
Original
(ब्रह्मा, विष्णु सदा शिव) (ब्रह्मा, विष्णु सदा शिव, अर्द्धांगी धारा) (ॐ हर, हर, हर, महादेव)
Verse 3
Original
एकानन, चतुरानन, पंचानन राजे (प्रभु, पंचानन राजे) हंसासन, गरुड़ासन (हंसासन, गरुड़ासन) वृषवाहन साजे (ॐ हर, हर, हर, महादेव)
Verse 4
Original
दो भुज, चारु चतुर्भुज, दस भुज अति सोहे (प्रभु, दस भुज अति सोहे) तीनों रूप निरखते (तीनों रूप निरखते) त्रिभुवन जन मोहे (ॐ हर, हर, हर, महादेव)
Verse 5
Original
अक्षमाला, बनमाला, मुंडमाल धारी (प्रभु, मुंडमाल धारी) चंदन मृगमद सोहे (चंदन मृगमद सोहे) भाले सुखकारी (ॐ हर, हर, हर, महादेव)
Verse 6
Original
श्वेताम्बर, पीताम्बर, बाघम्बर अंगे (प्रभु, बाघम्बर अंगे) ब्रह्मादिक सनकादिक (ब्रह्मादिक सनकादिक) प्रेतादिक संगे (ॐ हर, हर, हर, महादेव)
Verse 7
Original
कर मध्ये कमंडलु और त्रिशूल धारी (प्रभु, और त्रिशूल धारी) सुखकारी, दुखहारी (सुखकारी, दुखहारी) जगपालनकारी (ॐ हर, हर, हर, महादेव)
Verse 8
Original
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव जानत अविवेका (प्रभु, जानत अविवेका) प्रणवाक्षर में शोभित (प्रणवाक्षर में शोभित) ये तीनों एका (ॐ हर, हर, हर, महादेव)
Verse 9
Original
त्रिगुण, स्वामी की आरती जो कोई नर गावे (प्रभु, जो कोई नर गावे) कहत शिवानंद स्वामी (कहत शिवानंद स्वामी) मनवांछित फल पावे (ॐ हर, हर, हर, महादेव)