मल्लिकार्जुन की आरती — श्रीशैलम मंदिर के बोल और अर्थ
श्रीशैलम मंदिर से मल्लिकार्जुन की आरती, बोल और अर्थ
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Saturday, 6 March 2027· in 187 days
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परिचय
महत्व
आरती का सर्वोत्तम समय
अपना सटीक शुभ समय जानें अपने शहर और तिथि के लिए शुभ मुहूर्त और चौघड़िया देखें।
आरती कैसे करें
- 1भक्ति और श्रद्धा के साथ आरती का पाठ शुरू करें
- 2स्पष्ट और मधुर आवाज में आरती गाएं
- 3आरती के बोल के अर्थ और महत्व पर ध्यान केंद्रित करें
- 4अपने जीवन में भगवान की उपस्थिति का आह्वान करें
- 5भगवान को अपनी प्रार्थनाएं और कृतज्ञता अर्पित करें
मंत्र
Mallikarjuna Ki Aarti
जय जय मल्लिकार्जुना स्वामी, जय जय मल्लिकार्जुना
Jaya Jaya Mallikarjuna Swami, Jaya Jaya Mallikarjuna
अर्थ: Victory to Lord Mallikarjuna, victory to Lord Mallikarjuna
Mallikarjuna Ki Aarti
श्री शैल मल्लिकार्जुन नाथा, शरणं व्रजामि
Shri Shaila Mallikarjuna Natha, Sharanaam Vrajaami
अर्थ: I take refuge in Lord Mallikarjuna, the lord of the Shri Shaila mountain
Mallikarjuna Ki Aarti
जय जय मल्लिकार्जुना स्वामी, जय जय मल्लिकार्जुना
Jaya Jaya Mallikarjuna Swami, Jaya Jaya Mallikarjuna
अर्थ: Victory to Lord Mallikarjuna, victory to Lord Mallikarjuna
करें
- ✓भक्ति और श्रद्धा के साथ आरती का पाठ करें
- ✓भगवान को फूल और फल अर्पित करें
- ✓प्रेम और भाव से प्रसाद तैयार करें
- ✓आराम से बैठें और अपनी आंखें बंद करें
- ✓बोल के अर्थ और महत्व पर ध्यान केंद्रित करें
न करें
- ✗जल्दबाजी या ध्यान भटके होने पर आरती का पाठ न करें
- ✗भगवान को बासी या सड़े हुए फूल और फल न चढ़ाएं
- ✗नकारात्मक भाव या मंशा से प्रसाद तैयार न करें
- ✗असुविधाजनक स्थिति में या आंखें खोलकर न बैठें
- ✗सांसारिक विचारों या इच्छाओं पर ध्यान केंद्रित न करें
सामान्य गलतियाँ
- •बिना भक्ति या श्रद्धा के आरती का पाठ करना
- •भगवान को बासी या सड़े हुए फूल और फल चढ़ाना
- •नकारात्मक सोच या भावना के साथ प्रसाद तैयार करना
- •असुविधाजनक तरीके से या आंखें खोलकर बैठना
- •सांसारिक विचारों या इच्छाओं पर ध्यान केंद्रित करना
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मल्लिकार्जुन की आरती का क्या महत्व है?▾
मल्लिकार्जुन की आरती का पाठ कैसे करें?▾
लोकप्रिय टूल
संदर्भ और पारंपरिक टिप्पणियाँ
- •आरती का उल्लेख प्राचीन हिंदू ग्रंथों, जैसे पुराणों और उपनिषदों में मिलता है
- •भारत के विभिन्न भागों में भक्तों द्वारा अलग-अलग बोलों और धुनों के साथ आरती गाई जाती है
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