तुलसीदास का रामचरितमानस — रामायण का प्रिय हिंदी पुनर्कथन
तुलसीदास के रामचरितमानस की व्यापक मार्गदर्शिका — अवधी रामायण जिसने सदियों से उत्तर भारतीय भक्ति, संस्कृति और दैनिक पूजा को आकार दिया।
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Sunday, 8 November 2026· in 77 days
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परिचय
महत्व
शुभ समय
अपना सटीक शुभ समय जानें अपने शहर और तिथि के लिए शुभ मुहूर्त और चौघड़िया देखें।
आवश्यक सामग्री
तैयारी के चरण
- 1स्नान करें और स्वच्छ, अधिमानतः पारंपरिक वस्त्र पहनें (धोती-कुर्ता, साड़ी, या साधारण विनम्र परिधान)।
- 2पूजा स्थल को साफ करें और एक स्वच्छ कपड़ा ऊंचे मंच (चौकी) पर बिछाएं।
- 3रामचरितमानस को कपड़े पर श्रद्धा से दोनों हाथों से खोलकर रखें।
- 4घी का दीपक और धूप जलाएं; पुस्तक को देवता मानकर फूल, चंदन, कुमकुम अर्पित करें।
- 5गणेश, गुरु, हनुमान, और राम का लघु प्रार्थनाओं से आवाहन करें।
- 6संकल्प (इरादा) लें जिसमें अपना नाम, गोत्र, उद्देश्य (जैसे दैनिक पारायण, शांति के लिए नवाह्न), और राम को समर्पण बताएं।
- 7पूर्व या उत्तर मुख करके आसन पर बैठें, रीढ़ सीधी, मन शांत।
चरण
- 1बालकांड के आरंभ में मंगलाचरण (आवाहन पद) से शुरू करें: 'श्री गुरु चरन सरोज रज...' और 'बुद्धिहीन तनु जानिके...'।
- 2प्रत्येक चौपाई और दोहे का स्पष्ट उच्चारण और भाव (भावना) के साथ पाठ करें। यदि पारंपरिक धुन ज्ञात हो तो लयबद्ध स्वर में गाएं।
- 3प्रत्येक दोहे/चौपाई के अंत में अर्थ पर चिंतन के लिए रुकें; अध्ययन के लिए हिंदी टीका (जैसे गीता प्रेस टीका) पास रखें।
- 4महत्वपूर्ण प्रसंगों पर मानसिक पुष्पांजलि अर्पित करें — जैसे राम जन्म, वनवास, सीता स्वयंवर, हनुमान की छलांग, राम राज्याभिषेक।
- 5यदि समयबद्ध पारायण कर रहे हों (जैसे 9 दिन), सातों कांडों को दिनों में समान रूप से बांटें; नवाह्न और मासपारायण के लिए पारंपरिक कार्यक्रम मौजूद हैं।
- 6प्रत्येक सत्र का समापन उत्तरकांड के अंत में फलश्रुति (श्रवण फल) पदों से करें: 'जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा...' (हालांकि चालीसा अलग है, मानस की अपनी फलश्रुति है)।
- 7कपूर या घी के दीपक से आरती करें, 'श्री रामचंद्र कृपालु भजमन' या 'मंगल भवन अमंगल हारी' गाते हुए।
- 8प्रसाद वितरित करें; पुस्तक को प्रणाम करें और कपड़े में सम्मानपूर्वक लपेटकर रखें।
मंत्र
Mangalacharan (Opening Invocation - Balakanda)
श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि । बरनउँ रघुवर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥ बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार । बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेश बिकार ॥
Shri Guru charan saroj raj nij manu mukuru sudhari. Baranau raghuvar bimal jasu jo dayaku phal chari. Buddhiheen tanu janike sumiraun pavan-kumar. Bal budhi vidya dehu mohi harahu kalesh vikar.
अर्थ: I cleanse the mirror of my mind with the dust of my Guru's lotus feet. I narrate the spotless glory of Shri Rama, which bestows the four fruits of life (dharma, artha, kama, moksha). Knowing this body to be devoid of intelligence, I meditate on the Son of Wind (Hanuman). Grant me strength, wisdom, and knowledge; remove my sorrows and impurities.
Mangalacharan Doha (Continuation)
कवन सो काज कठिन जग माहीं । जो नहिं होइ तात तुम पाहिं ॥
Kavan so kaj kathin jag mahin. Jo nahi hoi tat tum pahi.
अर्थ: What difficult task is there in the world that cannot be accomplished by your grace, O Hanuman?
Shri Ram Stuti (From Balakanda - Rama's Glory)
मंगल भवन अमंगल हारी । द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ॥
Mangal bhavan amangal hari. Dravahu sudasara ath bihari.
अर्थ: O Abode of Auspiciousness, Remover of Inauspiciousness! O Dweller in the heart of King Dasharatha, be pleased with me.
Hanuman's Prayer to Rama (Sundarakanda)
सुनहु बिनय हमारी प्रभु राखेउ नाथ सुजान । जासु कृपा नहिं कृपा सम जासु कृपा नहिं ज्ञान ॥
Sunahu binay hamari prabhu rakheu nath sujan. Jasu kripa nahi kripa sam jasu kripa nahi gyan.
अर्थ: Hear my prayer, O Lord, Protector of the wise. There is no grace equal to Your grace; there is no knowledge equal to the knowledge bestowed by Your grace.
Phalashruti (Fruit of Recitation - End of Uttarakanda)
रामचरितमानस बिधि हरि हर गुन गाथा । कलि कुबुद्धि निवारि कर मंजुल मति द्रव द्रव द्रव ॥ जो यह पढ़हिं सुनहिं जन मन लाइ । तेहि भव बंधन काटि प्रभु बैकुंठ पठाइ ॥
Ramacharitamanas bidhi hari har gun gatha. Kali kubuddhi nivari kar manjul mati drav drav drav. Jo yah padhahin sunahin jan man lai. Tehi bhava bandhan kati prabhu baikunth pathai.
अर्थ: The Ramcharitmanas, narrating the glories of Hari and Hara by Brahma's will, melts the hardened intellect of Kali Yuga and grants beautiful wisdom. Those who read or hear it with devotion — the Lord cuts their bonds of samsara and leads them to Vaikuntha.
दिशानिर्देश
- •पाठ अवधि के दौरान शरीर और मन की पवित्रता बनाए रखें।
- •विस्तारित पारायण (नवाह्न/मासपारायण) कर रहे हों तो ब्रह्मचर्य (ब्रह्मचर्य) का पालन करें।
- •सात्विक भोजन करें; प्याज, लहसुन, मांस, शराब से बचें।
- •फर्श या साधारण बिस्तर पर सोएं; विलासिता से बचें।
- •सत्य बोलें, गपशप, क्रोध, और आलोचना से बचें।
- •चुने हुए पाठ कार्यक्रम को बिना व्यवधान पूरा करें; यदि छूट जाए तो प्रायश्चित (अतिरिक्त पाठ) करें।
करें
- ✓श्रद्धा (आस्था) और भाव से पढ़ें, यंत्रवत् नहीं।
- ✓गुरु या प्रामाणिक ऑडियो से सही उच्चारण सीखें।
- ✓पुस्तक को स्वच्छ, ऊंचे स्थान पर रखें; कभी फर्श पर न रखें।
- ✓ग्रंथ छूने से पहले हाथ धोएं।
- ✓कथा को परिवार से साझा करें; बच्चों को सरल पुनर्कथन में शामिल करें।
- ✓शिक्षाओं को लागू करें: दैनिक जीवन में सत्य, करुणा, कर्तव्य, और भक्ति का अभ्यास करें।
न करें
- ✗व्याकुल, क्रोधित, या अपवित्र अवस्था में न पढ़ें।
- ✗रामचरितमानस के ऊपर अन्य वस्तुएं न रखें।
- ✗अपनी व्यक्तिगत पारायण प्रति यूं ही किसी को न दें; यह पाठक का संकल्प सोख लेती है।
- ✗मनमाने ढंग से पद या कांड न छोड़ें; क्रम का पालन करें।
- ✗इसे मात्र साहित्य न मानें — यह मंत्र-स्वरूप (मंत्र का मूर्त रूप) है।
- ✗व्याख्याओं पर विवाद न करें; विविध संप्रदाय टीकाओं का सम्मान करें।
सामान्य गलतियाँ
- •समझे या महसूस किए बिना पदों को जल्दी-जल्दी पढ़ना।
- •बंधे ग्रंथ के बजाय क्षतिग्रस्त या फोटोकॉपी किए ढीले पन्नों का उपयोग करना।
- •केवल लोकप्रिय खंड (सुंदरकांड) पढ़ना और पूर्ण ग्रंथ की उपेक्षा करना।
- •गुरु-परंपरा और पारंपरिक टीका (टिप्पणी) के महत्व को नजरअंदाज करना।
- •पारायण को आंतरिक साधना के बजाय दूसरों के लिए प्रदर्शन बनाना।
- •अपने आचरण में राम के आदर्शों को लागू करने की उपेक्षा करना।
क्षेत्रीय विविधताएँ
- •अवध और पूर्वांचल में: मौखिक परंपरा से चली आ रही 'धुन' में चौपाई गायन की पारंपरिक शैली; रामलीला मंचन मानस पाठ का बारीकी से अनुसरण करते हैं।
- •मिथिला में: मैथिली टीकाएं और लयबद्ध पाठ शैली; सीता की महिमा पर जोर।
- •ब्रज में: ब्रज भक्ति परंपराओं के साथ एकीकरण; कीर्तन मंडलियाँ विशिष्ट रागों का उपयोग करती हैं।
- •महाराष्ट्र/गुजरात में: अवधी मूल के साथ मराठी/गुजराती अनुवादों का उपयोग; चातुर्मास में पारायण।
- •प्रवासी समुदायों में (कैरेबियन, फिजी, मॉरीशस, सूरीनाम): रामचरितमानस सामुदायिक पहचान का केंद्र; साप्ताहिक 'रामायण यज्ञ' हवन और प्रवचन के साथ।
- •दक्षिण भारत में: बढ़ती लोकप्रियता; तमिल/तेलुगु/कन्नड़ अनुवाद स्थानीय संगीत प्रस्तुतियों के साथ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या रामचरितमानस वाल्मीकि रामायण का अनुवाद है?▾
क्या महिलाएं और गैर-ब्राह्मण रामचरितमानस पढ़ सकते हैं?▾
रामचरितमानस और हनुमान चालीसा में क्या अंतर है?▾
पूर्ण रामचरितमानस पारायण में कितना समय लगता है?▾
कौन सा संस्करण/टीका सबसे प्रामाणिक है?▾
लोकप्रिय टूल
संदर्भ और पारंपरिक टिप्पणियाँ
- •तुलसीदास ने राम नवमी, विक्रम संवत 1631 (1574 ईस्वी) को वाराणसी में तुलसी घाट/असी घाट क्षेत्र में रचना आरंभ की।
- •ग्रंथ भागवत पुराण और विष्णु पुराण में वर्णित 'राम-अवतार' का अनुसरण करता है, न कि केवल वाल्मीकि का।
- •तुलसीदास का दर्शन: राम = ब्रह्म; जीव का लक्ष्य = प्रेम-भक्ति; साधन = नाम-स्मरण, सत्संग, गुरु-कृपा।
- •पांडुलिपि परंपरा: सबसे प्राचीन उपलब्ध पांडुलिपियाँ 17वीं शताब्दी की हैं; गीता प्रेस का समीक्षित संस्करण (1920 के दशक) ने पाठ को मानकीकृत किया।
- •रामनगर (वाराणसी) की रामलीला मानस को 31 दिनों में प्रस्तुत करती है — यूनेस्को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत।
- •गांधी की दैनिक प्रार्थना में रामचरितमानस के पद शामिल थे; उन्होंने इसे 'नैतिक मार्गदर्शन के लिए सर्वोत्तम पुस्तक' कहा।
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