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पद्मनाभ की आरती — तिरुवनंतपुरम मंदिर के बोल

तिरुवनंतपुरम मंदिर से पद्मनाभ की आरती के बोल और महत्व

By Sanatan Hindu2 min readUpdated 23 August 2026Audio available
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Padmanabha Ki Aarti — Thiruvananthapuram Temple Lyrics

परिचय

पद्मनाभ की आरती भगवान पद्मनाभ को समर्पित एक पवित्र हिंदू स्तोत्र है, जो केरल, भारत में स्थित तिरुवनंतपुरम मंदिर के मुख्य देवता हैं। यह आरती मंदिर में की जाने वाली दैनिक पूजा का अभिन्न अंग है, और इसके बोल आध्यात्मिक महत्व और भक्ति से भरे हुए हैं। आरती भगवान पद्मनाभ के प्रति भक्तों के प्रेम और श्रद्धा की सुंदर अभिव्यक्ति है, जिन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। तिरुवनंतपुरम मंदिर, जिसे अनंत पद्मनाभस्वामी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, भगवान विष्णु के 108 दिव्य देसमों में से एक है, और अपनी अद्भुत वास्तुकला और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है। पद्मनाभ की आरती मंदिर की परंपराओं का एक प्रिय हिस्सा है और भक्तों द्वारा बड़े उत्साह और भक्ति के साथ गाई जाती है। आरती आमतौर पर शाम के समय की जाती है, जब मंदिर दीयों की मुलायम रोशनी और धूप की मीठी सुगंध से भर जाता है। वातावरण शांत और शांतिपूर्ण होता है, और भक्त देवता के चारों ओर इकट्ठा होते हैं, उनके दिल प्रेम और भक्ति से भरे होते हैं, आरती गाते हैं और भगवान पद्मनाभ का आशीर्वाद मांगते हैं।

महत्व

पद्मनाभ की आरती हिंदू धर्म में बहुत महत्व रखती है, क्योंकि यह भगवान पद्मनाभ के प्रति भक्ति और श्रद्धा व्यक्त करने का एक शक्तिशाली साधन है। माना जाता है कि आरती में मन और आत्मा को शुद्ध करने की शक्ति होती है, और भक्त को दिव्य के करीब लाती है। आरती के बोल आध्यात्मिक महत्व से भरे हुए हैं, और प्रत्येक पद भक्त के भगवान के प्रति प्रेम और भक्ति की सुंदर अभिव्यक्ति है। आरती को भक्त के जीवन में शांति और समृद्धि लाने, और बुरी आत्माओं और नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करने की शक्ति भी माना जाता है। पद्मनाभ की आरती तिरुवनंतपुरम मंदिर में की जाने वाली दैनिक पूजा का अभिन्न अंग है, और इसका महत्व मंदिर से आगे भी फैला हुआ है, क्योंकि इसे घरों और अन्य पवित्र स्थानों में भी गाया जाता है, जिससे लोग दिव्य के करीब आते हैं और समुदाय और भक्ति की भावना को बढ़ावा मिलता है।

आरती का सर्वोत्तम समय

पद्मनाभ की आरती करने का सबसे अच्छा समय शाम का होता है, जब मंदिर दीयों की मुलायम रोशनी और धूप की मीठी सुगंध से भर जाता है। आरती आमतौर पर सूर्यास्त के बाद की जाती है, जब आकाश में तारे टिमटिमाने लगते हैं, और वातावरण शांत और शांतिपूर्ण होता है। हालांकि, आरती दिन के किसी भी समय की जा सकती है, बशर्ते भक्त का दिल प्रेम और भक्ति से भरा हो।

अपना सटीक शुभ समय जानें अपने शहर और तिथि के लिए शुभ मुहूर्त और चौघड़िया देखें।

आरती कैसे करें

  1. 1आराम से बैठकर और आँखें बंद करके शुरू करें
  2. 2कुछ गहरी साँसें लें और अपना मन दिव्य पर केंद्रित करें
  3. 3आरती गाना शुरू करें, चाहे अकेले या भक्तों के समूह के साथ
  4. 4जैसे-जैसे आप गाते हैं, बोलों और उनके पीछे के अर्थ पर ध्यान केंद्रित करें
  5. 5आरती की ऊर्जा को महसूस करें और इसे अपने दिल और आत्मा को भरने दें

मंत्र

Padmanabha Ki Aarti

जय पद्मनाभ जय जय, जय पद्मनाभ जय जय

Jaya Padmanabha Jaya Jaya, Jaya Padmanabha Jaya Jaya

अर्थ: Victory to Lord Padmanabha, victory to the lord of the lotus

Verse 1

त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बंधुश्च सखा त्वमेव

Tvameva Mata Cha Pita Tvameva, Tvameva Bandhushcha Sakha Tvameva

अर्थ: You are my mother, my father, my brother, and my friend

Verse 2

त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देव देव

Tvameva Vidya Dravinam Tvameva, Tvameva Sarvam Mama Deva Deva

अर्थ: You are my knowledge, my wealth, my everything, oh lord of lords

करें

  • भक्ति और प्रेम के साथ आरती गाएं
  • आरती की ऊर्जा को महसूस करें और इसे अपने दिल और आत्मा को भरने दें
  • देवता को प्रसाद और फूल अर्पित करें

न करें

  • भटके हुए मन से आरती न गाएं
  • अशुद्ध दिल से प्रसाद और फूल अर्पित न करें
  • आरती के दौरान दूसरों को परेशान न करें

सामान्य गलतियाँ

  • फोकस और भक्ति के बिना आरती गाना
  • देवता को प्रसाद और फूल अर्पित न करना
  • आरती के दौरान दूसरों को परेशान करना

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पद्मनाभ की आरती का क्या महत्व है?
पद्मनाभ की आरती भगवान पद्मनाभ के प्रति भक्ति और श्रद्धा व्यक्त करने का एक शक्तिशाली साधन है, और माना जाता है कि इसमें मन और आत्मा को शुद्ध करने की शक्ति होती है।
पद्मनाभ की आरती करने का सबसे अच्छा समय कब है?
पद्मनाभ की आरती करने का सबसे अच्छा समय शाम का होता है, जब मंदिर दीयों की मुलायम रोशनी और धूप की मीठी सुगंध से भर जाता है।

संदर्भ और पारंपरिक टिप्पणियाँ

  • पद्मनाभ की आरती का उल्लेख प्राचीन हिंदू ग्रंथों में मिलता है, जिसमें भागवत पुराण और पद्म पुराण शामिल हैं

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