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शिव आरती - ओम जय शिव ओंकार: एक भक्ति गीत

ओम जय शिव ओंकार, एक प्रतिष्ठित शिव आरती, भगवान शिव की स्तुति में गाई जाती है, जो भक्ति और आध्यात्मिकता का प्रतीक है।

By Sanatan Hindu2 min readUpdated 11 August 2026Audio available
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Shiv Aarti - Om Jai Shiv Omkara: A Devotional Hymn

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Saturday, 6 March 2027· in 206 days

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परिचय

शिव आरती, 'ओम जय शिव ओंकार', भगवान शिव को समर्पित एक पवित्र स्तोत्र है, जो हिंदू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं। यह आरती भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ज्ञान की खोज की एक सुंदर अभिव्यक्ति है। इसे मंदिरों और घरों में समान रूप से बड़े उत्साह और समर्पण के साथ गाया जाता है, विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा के दौरान। यह आरती हिंदू आध्यात्मिकता के सार को समाहित करती है, जो व्यक्तिगत आत्मा (आत्मा) को ब्रह्मांडीय आत्मा (ब्रह्म) से जोड़ने का प्रयास करती है, जिसका प्रतीक भगवान शिव हैं। 'ओम जय शिव ओंकार' जैसी आरतियों को गाने का अभ्यास हिंदू पूजा का एक अभिन्न अंग है, जो दिव्य आशीर्वाद का आह्वान करने, पिछले कर्मों के लिए क्षमा मांगने और आध्यात्मिकता एवं शांति की गहरी भावना विकसित करने का एक साधन है। आरती करने का अनुष्ठान, जिसमें दीपक (दीप) को घुमाते हुए भजनों का गायन शामिल है, हिंदू पूजा में महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अंधकार (अज्ञान) को दूर करने और ज्ञान एवं बुद्धि के प्रकाश का प्रतीक है। 'ओम जय शिव ओंकार' के संदर्भ में, यह अनुष्ठान और भी गहरा हो जाता है क्योंकि यह भगवान शिव की ओर निर्देशित है, जिन्हें अक्सर बुराई के विनाशक और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के अवतार के रूप में पूजा जाता है।

महत्व

'ओम जय शिव ओंकार' का महत्व उन लोगों में आध्यात्मिक जागृति और भक्ति की भावना जगाने की इसकी क्षमता में निहित है। यह आरती इस तरह से रची गई है कि यह न केवल भगवान शिव की स्तुति करती है बल्कि भक्त को आध्यात्मिक ज्ञान के मार्ग की याद भी दिलाती है। मंत्र 'ओम जय शिव ओंकार' का जाप भक्त के लिए शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक विकास लाने वाला माना जाता है। इसके अलावा, इस आरती को सामूहिक रूप से गाने से समुदाय और साझा भक्ति की भावना को बढ़ावा मिलता है, जो हिंदू आध्यात्मिक अभ्यास की आधारशिला है।

आरती का सर्वोत्तम समय

'ओम जय शिव ओंकार' आरती करने का सबसे अच्छा समय शाम का है, दैनिक पूजा अनुष्ठानों के पूरा होने के बाद। हालांकि, इसे दिन के किसी भी समय गाया जा सकता है, विशेष रूप से सोमवार को, जो भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

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आरती कैसे करें

  1. 1विघ्नहर्ता भगवान गणेश का आह्वान करके शुरुआत करें
  2. 2भगवान शिव से प्रार्थना करें, उनका आशीर्वाद और क्षमा मांगें
  3. 3भक्ति और एकाग्रता के साथ 'ओम जय शिव ओंकार' आरती गाएं
  4. 4देवता के सामने दीपक को गोलाकार गति में घुमाएं, जो अंधकार को दूर करने और प्रकाश फैलाने का प्रतीक है
  5. 5भगवान शिव का आशीर्वाद मांगकर और भक्तों में प्रसाद वितरित करके आरती का समापन करें

मंत्र

Om Jai Shiv Omkara

ॐ जय शिव ओंकारा

Om Jai Shiv Omkara

अर्थ: Victory to Lord Shiva, the Omkara (the cosmic sound)

First Verse

जय शिव ओंकारा, जय शिव ओंकारा

Jai Shiv Omkara, Jai Shiv Omkara

अर्थ: Victory to Lord Shiva, the Omkara

Second Verse

ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्धनारीश्वर

Brahma, Vishnu, Sadashiva, Ardhanareshvara

अर्थ: Brahma, Vishnu, the Eternal Shiva, the Half-Female, Half-Male Form

करें

  • आरती को भक्ति और ईमानदारी से गाएं
  • बेहतर आध्यात्मिक अनुभव के लिए सामूहिक जाप में भाग लें
  • आरती के दौरान शांतिपूर्ण और स्वच्छ वातावरण बनाए रखें

न करें

  • आरती को जल्दबाजी में या बिना ध्यान के न गाएं
  • आरती के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग जैसे विकर्षणों से बचें
  • शुद्धिकरण और तैयारी के चरणों को न छोड़ें

सामान्य गलतियाँ

  • आरती से पहले शरीर और मन को ठीक से तैयार न करना
  • इसका अर्थ या महत्व समझे बिना आरती गाना
  • पूजा क्षेत्र की पवित्रता बनाए न रखना

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'ओम जय शिव ओंकार' का क्या महत्व है?
यह एक भक्ति स्तोत्र है जो भगवान शिव के प्रति पूजा और भक्ति की भावना को समाहित करता है, उनका आशीर्वाद और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करता है।
क्या 'ओम जय शिव ओंकार' को किसी भी समय गाया जा सकता है?
हां, इसे किसी भी समय गाया जा सकता है, लेकिन शाम को या सोमवार को गाना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

संदर्भ और पारंपरिक टिप्पणियाँ

  • 'ओम जय शिव ओंकार' आरती विभिन्न हिंदू ग्रंथों और भजन पुस्तकों में पाई जाती है
  • आरती गाने की परंपरा पुराणों और अन्य प्राचीन हिंदू ग्रंथों में उल्लिखित है

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