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Hanuman Chalisa (From "Hanuman Chalisa - Zee Music Devotional")

Artist: Sanjeev-Ajay

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Hanuman Chalisa (From "Hanuman Chalisa - Zee Music Devotional")

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(राम, राम, राम, राम)

Original

(राम, राम, राम, राम) (राम, राम, राम, राम) (राम, राम, राम, राम)

Verse 2

Original

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर जय कपीश तिहुँ लोक उजागर राम दूत अतुलित बल धामा अंजनि पुत्र पवनसुत नामा

Verse 3

Original

महाबीर बिक्रम बजरंगी कुमति निवार सुमति के संगी कंचन बरन विराज सुबेशा कानन कुंडल कुँचित केशा

Verse 4

Original

हाथ वज्र औ ध्वजा बिराजे काँधे मूँज जनेऊ साजे शंकर सुवन केसरी नंदन तेज प्रताप महा जगवंदन

Verse 5

Original

विद्यावान गुनी अति चातुर राम काज करिबे को आतुर प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया राम लखन सीता मनबसिया

Verse 6

Original

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा बिकट रूप धरि लंक जरावा भीम रूप धरि असुर सँहारे रामचंद्र के काज सँवारे

Verse 7

Original

लाय संजीवन लखन जियाए श्री रघुबीर हरषि उर लाए

Verse 8

Original

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर जय कपीश तिहुँ लोक उजागर

Verse 9

Original

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई तुम मम प्रिय भरतहिं सम भाई सहस बदन तुम्हरो जस गावै अस कहि श्रीपति कंठ लगावै

Verse 10

Original

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीशा नारद शारद सहित अहीशा

Verse 11

Original

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते कवि कोविद कहि सके कहाँ ते तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा राम मिलाय राज पद दीन्हा

Verse 12

Original

तुम्हरो मंत्र विभीषण माना लंकेश्वर भये सब जग जाना जुग सहस्त्र जोजन पर भानू लीयो ताहि मधुर फल जानू

Verse 13

Original

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही जलधि लाँघि गए अचरज नाहीं दुर्गम काज जगत के जेते सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते

Verse 14

Original

राम दुआरे तुम रखवारे होत न आज्ञा बिनु पैसारे सब सुख लहै तुम्हारी सरणा तुम रक्षक, काहू को डरना

Verse 15

Original

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर जय कपीश तिहुँ लोक उजागर

Verse 16

Original

आपन तेज सम्हारो आपै तीनों लोक हाँक ते काँपै भूत पिशाच निकट नहि आवै महाबीर जब नाम सुनावै

Verse 17

Original

नासै रोग हरे सब पीरा जपत निरंतर हनुमत वीरा संकट से हनुमान छुड़ावै मन क्रम वचन ध्यान जो लावै

Verse 18

Original

सब पर राम तपस्वी राजा तिनके काज सकल तुम साजा और मनोरथ जो कोई लावै सोइ अमित जीवन फल पावै

Verse 19

Original

चारों जुग परताप तुम्हारा है परसिद्ध जगत उजियारा साधु संत के तुम रखवारे असुर निकंदन राम दुलारे

Verse 20

Original

अष्ट सिद्धी नौ निधि के दाता अस बर दीन जानकी माता राम रसायन तुम्हरे पासा सदा रहो रघुपति के दासा

Verse 21

Original

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर जय कपीश तिहुँ लोक उजागर

Verse 22

Original

तुम्हरे भजन राम को पावै जनम-जनम के दुख बिसरावै अंतकाल रघुवर पुर जाई जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई

Verse 23

Original

और देवता चित्त ना धरई हनुमत सेई सर्व सुख करई संकट हटै, मिटै सब पीरा जो सुमिरै हनुमत बलवीरा

Verse 24

Original

जय, जय, जय हनुमान गोसाईं कृपा करहु गुरु देव की नाई यह सत बार पाठ करै कोई छूटहि बंदि, महा सुख होई

Verse 25

Original

जो यह पढ़े हनुमान चालीसा होय सिद्धि साखी गौरीसा तुलसीदास सदा हरि चेरा कीजै नाथ हृदय मँह डेरा

GowraHari

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