Hanuman Chalisa (From "HanuMan") [Telugu]
Complete lyrics with original text, transliteration, and meaning, 25 sections
Hanuman Chalisa (From "Hanuman Chalisa - Zee Music Devotional")
(राम, राम, राम, राम)
Original
(राम, राम, राम, राम) (राम, राम, राम, राम) (राम, राम, राम, राम)
Verse 2
Original
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर जय कपीश तिहुँ लोक उजागर राम दूत अतुलित बल धामा अंजनि पुत्र पवनसुत नामा
Verse 3
Original
महाबीर बिक्रम बजरंगी कुमति निवार सुमति के संगी कंचन बरन विराज सुबेशा कानन कुंडल कुँचित केशा
Verse 4
Original
हाथ वज्र औ ध्वजा बिराजे काँधे मूँज जनेऊ साजे शंकर सुवन केसरी नंदन तेज प्रताप महा जगवंदन
Verse 5
Original
विद्यावान गुनी अति चातुर राम काज करिबे को आतुर प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया राम लखन सीता मनबसिया
Verse 6
Original
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा बिकट रूप धरि लंक जरावा भीम रूप धरि असुर सँहारे रामचंद्र के काज सँवारे
Verse 7
Original
लाय संजीवन लखन जियाए श्री रघुबीर हरषि उर लाए
Verse 8
Original
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर जय कपीश तिहुँ लोक उजागर
Verse 9
Original
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई तुम मम प्रिय भरतहिं सम भाई सहस बदन तुम्हरो जस गावै अस कहि श्रीपति कंठ लगावै
Verse 10
Original
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीशा नारद शारद सहित अहीशा
Verse 11
Original
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते कवि कोविद कहि सके कहाँ ते तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा राम मिलाय राज पद दीन्हा
Verse 12
Original
तुम्हरो मंत्र विभीषण माना लंकेश्वर भये सब जग जाना जुग सहस्त्र जोजन पर भानू लीयो ताहि मधुर फल जानू
Verse 13
Original
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही जलधि लाँघि गए अचरज नाहीं दुर्गम काज जगत के जेते सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते
Verse 14
Original
राम दुआरे तुम रखवारे होत न आज्ञा बिनु पैसारे सब सुख लहै तुम्हारी सरणा तुम रक्षक, काहू को डरना
Verse 15
Original
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर जय कपीश तिहुँ लोक उजागर
Verse 16
Original
आपन तेज सम्हारो आपै तीनों लोक हाँक ते काँपै भूत पिशाच निकट नहि आवै महाबीर जब नाम सुनावै
Verse 17
Original
नासै रोग हरे सब पीरा जपत निरंतर हनुमत वीरा संकट से हनुमान छुड़ावै मन क्रम वचन ध्यान जो लावै
Verse 18
Original
सब पर राम तपस्वी राजा तिनके काज सकल तुम साजा और मनोरथ जो कोई लावै सोइ अमित जीवन फल पावै
Verse 19
Original
चारों जुग परताप तुम्हारा है परसिद्ध जगत उजियारा साधु संत के तुम रखवारे असुर निकंदन राम दुलारे
Verse 20
Original
अष्ट सिद्धी नौ निधि के दाता अस बर दीन जानकी माता राम रसायन तुम्हरे पासा सदा रहो रघुपति के दासा
Verse 21
Original
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर जय कपीश तिहुँ लोक उजागर
Verse 22
Original
तुम्हरे भजन राम को पावै जनम-जनम के दुख बिसरावै अंतकाल रघुवर पुर जाई जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई
Verse 23
Original
और देवता चित्त ना धरई हनुमत सेई सर्व सुख करई संकट हटै, मिटै सब पीरा जो सुमिरै हनुमत बलवीरा
Verse 24
Original
जय, जय, जय हनुमान गोसाईं कृपा करहु गुरु देव की नाई यह सत बार पाठ करै कोई छूटहि बंदि, महा सुख होई
Verse 25
Original
जो यह पढ़े हनुमान चालीसा होय सिद्धि साखी गौरीसा तुलसीदास सदा हरि चेरा कीजै नाथ हृदय मँह डेरा