कजरी तीज — तीसरे तीज पर्व का महत्व

कजरी तीज, तीसरा तीज पर्व, हिंदू धर्म में विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है, जो भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित है।

By Sanatan Hindu3 min readUpdated 31 August 2026Audio available
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Kajari Teej — Third Teej Festival Significance

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परिचय

कजरी तीज हिंदू पंचांग का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इसे बड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है, और इसका अनुष्ठान विभिन्न क्षेत्रों एवं समुदायों में अलग-अलग प्रकार से किया जाता है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन को समर्पित है, जो पति-पत्नी के शाश्वत संबंध का प्रतीक है। इस उत्सव में उपवास, पूजन और पारंपरिक अनुष्ठान शामिल हैं जो क्षेत्र के अनुसार भिन्न हो सकते हैं। कुछ क्षेत्रों में कजरी तीज विशेष उत्साह के साथ मनाई जाती है, जो हिंदू परंपराओं की विविधता को दर्शाती है। यह पर्व आध्यात्मिक चिंतन, नवीनीकरण और वैवाहिक बंधनों को प्रगाढ़ करने का समय है। ऐसी मान्यता है कि व्रत रखने और विधिपूर्वक अनुष्ठान करने से विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन की प्राप्ति होती है, जबकि अविवाहित कन्याओं को सुयोग्य जीवनसाथी मिलता है। यह पर्व उन लोगों के हृदय में भी विशेष स्थान रखता है जो भक्ति की शक्ति और दिव्य मातृशक्ति के सम्मान में विश्वास करते हैं। कजरी तीज की तैयारियां कई दिन पहले से शुरू हो जाती हैं, जिसमें महिलाएं अपने घरों को सुंदर रंगोली से सजाती हैं, पारंपरिक मिठाइयां बनाती हैं और पूजा की आवश्यक सामग्री एकत्रित करती हैं। पर्व के मुख्य दिन कई अनुष्ठान किए जाते हैं, जिनमें भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा तथा विवाहित महिलाओं द्वारा कठोर व्रत का पालन शामिल है। यह व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही खोला जाता है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। पर्व का समापन प्रसाद वितरण और परिवारजनों व मित्रों के साथ उपहारों के आदान-प्रदान के साथ होता है।

महत्व

कजरी तीज अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का स्मरण कराती है, जो पति-पत्नी के शाश्वत बंधन का प्रतीक है। यह पर्व वैवाहिक दंपतियों के लिए सौभाग्य, सुख और समृद्धि लाने वाला माना जाता है, तथा अविवाहित कन्याओं को सुयोग्य जीवनसाथी का आशीर्वाद प्रदान करता है। कजरी तीज से जुड़े अनुष्ठान और परंपराएं आध्यात्मिक उन्नति, आत्म-चिंतन और वैवाहिक बंधनों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से की जाती हैं।

कब मनाएं

कजरी तीज पूजा करने का सबसे उत्तम समय भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है, जो सामान्यतः अगस्त या सितंबर में आती है। पूजा शाम के समय, सूर्यास्त के बाद की जानी चाहिए, जब आकाश में चंद्रमा दृश्यमान हो।

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आवश्यक सामग्री

भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्तियां या चित्र
अगरबत्ती / धूपबत्ती
दीपक (दिया)
फूल
फल
मिठाइयां
जल
दूध
शहद
घी
कपूर
रंगोली पाउडर

तैयारी कैसे करें

  1. 1पूजा स्थल की सफाई करें और उसे सजाएं
  2. 2आवश्यक पूजा सामग्री व्यवस्थित करें
  3. 3पारंपरिक मिठाइयां और पकवान तैयार करें
  4. 4घर को रंगोली से सजाएं

कैसे मनाएं

  1. 1दीपक और अगरबत्ती जलाकर पूजा आरंभ करें
  2. 2भगवान शिव और माता पार्वती को पुष्प, फल और मिष्ठान्न अर्पित करें
  3. 3अनुष्ठान संपन्न करें और निर्धारित मंत्रों का जाप करें
  4. 4कठोर व्रत का पालन करें और चंद्र दर्शन होने तक अन्न-जल ग्रहण करने से बचें
  5. 5चंद्र दर्शन के पश्चात व्रत का पारण करें और परिवारजनों व मित्रों में प्रसाद वितरित करें

मंत्र

Shiva Mantra

ॐ नमः शिवाय

Om Namah Shivaya

अर्थ: Salutations to Lord Shiva

Parvati Mantra

ॐ पार्वती देव्यै नमः

Om Parvati Devyai Namah

अर्थ: Salutations to Goddess Parvati

पालन के नियम

  • विवाहित महिलाओं को कजरी तीज के दिन कठोर व्रत का पालन करना चाहिए
  • व्रत का पारण चंद्र दर्शन के बाद ही किया जाना चाहिए
  • अविवाहित कन्याएं आंशिक व्रत रख सकती हैं अथवा बिना उपवास के केवल अनुष्ठान संपन्न कर सकती हैं

करें

  • पूरी भक्ति और निष्ठा के साथ सभी अनुष्ठान संपन्न करें
  • भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा और प्रार्थना करें
  • परिवारजनों और मित्रों में प्रसाद वितरित करें तथा उपहारों का आदान-प्रदान करें

न करें

  • व्रत के दौरान किसी भी प्रकार के अन्न या जल के सेवन से बचें
  • पूजा के समय किसी भी सांसारिक गतिविधि में लिप्त होने से बचें
  • कजरी तीज से जुड़े विधि-विधानों और परंपराओं की उपेक्षा न करें

सामान्य गलतियाँ

  • भक्ति और निष्ठा के साथ अनुष्ठान करने में लापरवाही बरतना
  • चंद्र दर्शन से पूर्व ही व्रत खोल लेना
  • परिवारजनों और मित्रों में प्रसाद वितरित न करना

क्षेत्रीय विविधताएँ

  • कुछ क्षेत्रों में कजरी तीज अन्य क्षेत्रों की तुलना में अत्यधिक उत्साह और उल्लास के साथ मनाई जाती है
  • पर्व से जुड़े रीति-रिवाज और परंपराएं विभिन्न समुदायों एवं परंपराओं के अनुसार भिन्न हो सकती हैं

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कजरी तीज का क्या महत्व है?
कजरी तीज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का सम्मान करती है, जो पति-पत्नी के शाश्वत संबंध का प्रतीक है।
कजरी तीज से जुड़े प्रमुख अनुष्ठान और परंपराएं क्या हैं?
कजरी तीज के प्रमुख अनुष्ठानों में उपवास रखना, पूजन करना तथा परिवार के सदस्यों और मित्रों में प्रसाद वितरित करना शामिल है।

संदर्भ और पारंपरिक टिप्पणियाँ

  • इस पर्व का उल्लेख पुराणों और महाभारत सहित विभिन्न हिंदू धर्मग्रंथों में मिलता है
  • कजरी तीज से जुड़े अनुष्ठान और परंपराएं पीढ़ियों से चली आ रही हैं और विभिन्न क्षेत्रों व समुदायों में भिन्न हो सकती हैं

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