Rama Nama Mahima
Complete lyrics with original text, transliteration, and meaning, 18 sections
Rama Navami
Original
राम नाम महिमा की कथा सुनाते हैं राम रूप मन में हनुमान दिखाते हैं
Verse 2
Original
राम नाम महिमा की कथा सुनाते हैं राम रूप मन में हनुमान दिखाते हैं (राम-राम, जय राम-राम, जय राम-राम, जय राजा राम) (राम-राम, जय राम-राम, जय राम-राम, जय राजा राम)
Verse 3
Original
श्री राम के चरणों में बारंबार नमन करते सुग्रीव के दुख की व्यथा श्री राम से हनुमत कहते अति बलशाली बाली का वध राम जी हैं उस क्षण कर दें चारों ओर सीता की खोज में वानर वीर निकल पड़ते
Verse 4
Original
ढूँढते पहुँचे बजरंगी लंका में थी जानकी पहले करते माँ को प्रणाम फिर देते मुंदरी हनुमान
Verse 5
Original
राक्षस सारे हनुमत पूँछ में आग लगा देते फिर हनुमान जी बिजली बनकर लंका जला देते
Verse 6
Original
राम नाम महिमा की कथा सुनाते हैं राम रूप मन में हनुमान दिखाते हैं (राम-राम, जय राम-राम, जय राम-राम, जय राजा राम) (राम-राम, जय राम-राम, जय राम-राम, जय राजा राम)
Verse 7
Original
अंतहीन सागर के ऊपर वानर सेतु बनाते छोटी गिलहरी जैसे जीव भी योगदान हैं देते आरंभम्, प्रारंभम्, संग्रामम् समरंभम्, राम रावण का युद्ध हुआ मेघनाद की दिव्य शक्ति से मूर्छित हुए, गिरे लक्ष्मण
Verse 8
Original
प्राणों से प्यारे भाई को देख राम रोते शोक में डूबे माँ की भांति, रोए पितृ जैसे गगन सितारे डरते सारे, हनुमत लाते औषधि पर्वत संजीवनी लाए, लखन जिलाए, बने राम सुत प्यारे हनुमत
Verse 9
Original
राम नाम महिमा की कथा सुनाते हैं राम रूप मन में हनुमान दिखाते हैं (राम-राम, जय राम-राम, जय राम-राम, जय राजा राम) (राम-राम, जय राम-राम, जय राम-राम, जय राजा राम)
Verse 10
Original
कुंभकर्ण संहार, मेघनाद संहार सुनके रावण चकित हुआ ये देखो, राम-बाण है देखो रावण अंत तक है देखो वो देखो सुदर्शनं वही, वही शिवं त्रिशूलं
Verse 11
Original
काट के वह दसकंध नाभि में जाके लगा गिर गया वो धरती पर दैत्य सितारा राम उसे फिर मोक्ष देते बन तारणहारा
Verse 12
Original
राम नाम महिमा की कथा सुनाते हैं राम रूप मन में हनुमान दिखाते हैं (राम-राम, जय राम-राम, जय राम-राम, जय राजा राम) (राम-राम, जय राम-राम, जय राम-राम, जय राजा राम)
Verse 13
Original
पतित पावनी जानकी हैं पति ने माँगी अग्नि परीक्षा राम ने सिया को उपहार दिया या नारी का अपमान किया
Verse 14
Original
आग की जलती लपटों में सीता बन गई है समीधा तब भी देव की ज्योति में सिद्ध हुई सिय पवित्रता
Verse 15
Original
धरती के ऊपर नील मेघ जैसे अंबर में उड़ा पुष्पक यान है
Verse 16
Original
सत्य पर आँच है आया ऐसे धर्म का चक्र चला है जैसे रावण का भय मिट गया सारा राम राज्य है अब तो आया
Verse 17
Original
राम-राम रघुनाथ प्रभु जी, रावण संघारक रघुवीर नाम जपो आशीष मिले, प्रभु, रमा रमण नारायणा
Verse 18
Original
राम-राम रघुनाथ प्रभु जी, रावण संघारक रघुवीर नाम जपो आशीष मिले, प्रभु, रमा रमण नारायणा राम-राम रघुनाथ प्रभु जी, रावण संघारक रघुवीर नाम जपो आशीष मिले, प्रभु, रमा रमण नारायणा