Hanumanstotralyrics

Sunderkand Path - Part. 1

Complete lyrics with original text, transliteration, and meaning, 87 sections

Sunderkand Path - Complete Recitation

Ajay Mundhra31:40stotra

Original

(शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं) (ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम्) (रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरुं मायामनुष्यं हरिं) (वन्देऽहं करुणाकरं रघुवरं भूपालचूडामणिम्)

(नान्या स्पृहा रघुपते हृदयेऽस्मदीये)

Original

(सत्यं वदामि च भवानखिलान्तरात्मा) (भक्तिं प्रयच्छ रघुपुंगव निर्भरां मे) (कामादिदोषरहितं कुरु मानसं च)

(अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं)

Original

(दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्) (सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं) (रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि)

Verse 4

Original

जामवंत के बचन सुहाए सुनि हनुमंत हृदय अति भाए तब लगि मोहि परिखेहु तुम्ह भाई सहि दु:ख कंद मूल फल खाई

Verse 5

Original

जब लगि आवौं सीतहि देखी होइहि काजु मोहि हरष बिसेषी यह कहि नाइ सबन्हि कहुँ माथा चलेउ हरषि हियँ धरि रघुनाथा

Verse 6

Original

सिंधु तीर एक भूधर सुंदर कौतुक कूदि चढ़ेउ ता ऊपर बार-बार रघुबीर सँभारी तरकेउ पवनतनय बल भारी

Verse 7

Original

(जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम) (जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम)

Verse 8

Original

जेहिं गिरि चरन देइ हनुमंता चलेउ सो गा पाताल तुरंता जिमि अमोघ रघुपति कर बाना एही भाँति चलेउ हनुमाना

Verse 9

Original

जलनिधि रघुपति दूत बिचारी तैं मैनाक होहि श्रम हारी

Verse 10

Original

हनूमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह प्रनाम राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ बिश्राम

Verse 11

Original

जात पवनसुत देवन्ह देखा जानैं कहुँ बल बुद्धि बिसेषा सुरसा नाम अहिन्ह कै माता पठइन्हि आइ कही तेहिं बाता

Verse 12

Original

आजु सुरन्ह मोहि दीन्ह अहारा सुनत बचन कह पवनकुमारा राम काजु करि फिरि मैं आवौं सीता कइ सुधि प्रभुहि सुनावौं

Verse 13

Original

तब तव बदन पैठिहउँ आई सत्य कहउँ मोहि जान दे माई कवनेहुँ जतन देइ नहिं जाना ग्रससि न मोहि कहेउ हनुमाना

Verse 14

Original

(जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम) (जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम)

Verse 15

Original

जोजन भरि तेहिं बदनु पसारा कपि तनु कीन्ह दुगुन बिस्तारा सोरह जोजन मुख तेहिं ठयऊ तुरत पवनसुत बत्तिस भयऊ

Verse 16

Original

जस जस सुरसा बदनु बढ़ावा तासु दून कपि रूप देखावा सत जोजन तेहिं आनन कीन्हा अति लघु रूप पवनसुत लीन्हा

Verse 17

Original

बदन पइठि पुनि बाहेर आवा मागा बिदा ताहि सिरु नावा मोहि सुरन्ह जेहि लागि पठावा बुधि बल मरमु तोर मैं पावा

Verse 18

Original

राम काजु सबु करिहहु तुम्ह बल बुद्धि निधान आसिष देइ गई सो हरषि चलेउ हनुमान

Verse 19

Original

निसिचरि एक सिंधु महुँ रहई करि माया नभु के खग गहई जीव जंतु जे गगन उड़ाहीं जल बिलोकि तिन्ह कै परिछाहीं

Verse 20

Original

गहइ छाहँ सक सो न उड़ाई एहि बिधि सदा गगनचर खाई सोइ छल हनूमान् कहँ कीन्हा तासु कपटु कपि तुरतहिं चीन्हा

Verse 21

Original

ताहि मारि मारुतसुत बीरा बारिधि पार गयउ मतिधीरा तहाँ जाइ देखी बन सोभा गुंजत चंचरीक मधु लोभा

Verse 22

Original

(जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम) (जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम)

Verse 23

Original

नाना तरु फल फूल सुहाए खग मृग बृंद देखि मन भाए सैल बिसाल देखि एक आगें ता पर धाइ चढ़ेउ भय त्यागें

Verse 24

Original

उमा न कछु कपि कै अधिकाई प्रभु प्रताप जो कालहि खाई गिरि पर चढ़ि लंका तेहिं देखी कहि न जाइ अति दुर्ग बिसेषी

Verse 25

Original

अति उतंग जलनिधि चहुँ पासा कनक कोट कर परम प्रकासा

Verse 26

Original

कनक कोटि बिचित्र मनि कृत सुंदरायतना घना चउहट्ट हट्ट सुबट्ट बीथीं चारु पुर बहु बिधि बना गज बाजि खच्चर निकर पदचर रथ बरूथन्हि को गनै बहुरूप निसिचर जूथ अतिबल सेन बरनत नहिं बनै

Verse 27

Original

बन बाग उपबन बाटिका सर कूप बापीं सोहहीं नर नाग सुर गंधर्ब कन्या रूप मुनि मन मोहहीं कहुँ माल देह बिसाल सैल समान अतिबल गर्जहीं नाना अखारेन्ह भिरहिं बहुबिधि एक एकन्ह तर्जहीं

Verse 28

Original

करि जतन भट कोटिन्ह बिकट तन नगर चहुँ दिसि रच्छहीं कहुँ महिष मानुष धेनु खर अज खल निसाचर भच्छहीं एहि लागि तुलसीदास इन्ह की कथा कछु एक है कही रघुबीर सर तीरथ सरीरन्हि त्यागि गति पैहहिं सही

Verse 29

Original

पुर रखवारे देखि बहु कपि मन कीन्ह बिचार अति लघु रूप धरों निसि नगर करौं पइसार

Verse 30

Original

मसक समान रूप कपि धरी लंकहि चलेउ सुमिरि नरहरी नाम लंकिनी एक निसिचरी सो कह चलेसि मोहि निंदरी

Verse 31

Original

जानेहि नहीं मरमु सठ मोरा मोर अहार जहाँ लगि चोरा मुठिका एक महा कपि हनी रुधिर बमत धरनीं ढनमनी

Verse 32

Original

पुनि संभारि उठी सो लंका जोरि पानि कर बिनय ससंका जब रावनहि ब्रह्म बर दीन्हा चलत बिरंच कहा मोहि चीन्हा

Verse 33

Original

(जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम) (जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम)

Verse 34

Original

बिकल होसि तैं कपि कें मारे तब जानेसु निसिचर संघारे तात मोर अति पुन्य बहूता देखेउँ नयन राम कर दूता

Verse 35

Original

तात स्वर्ग अपबर्ग सुख धरिअ तुला एक अंग तूल न ताहि सकल मिलि जो सुख लव सतसंग

Verse 36

Original

प्रबिसि नगर कीजे सब काजा हृदय राखि कोसलपुर राजा गरल सुधा रिपु करहिं मिताई गोपद सिंधु अनल सितलाई

Verse 37

Original

गरुड़ सुमेरु रेनु सम ताही राम कृपा करि चितवा जाही अति लघु रूप धरेउ हनुमाना पैठा नगर सुमिरि भगवाना

Verse 38

Original

मंदिर मंदिर प्रति करि सोधा देखे जहँ तहँ अगनित जोधा गयउ दसानन मंदिर माहीं अति बिचित्र कहि जात सो नाहीं

Verse 39

Original

(जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम) (जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम)

Verse 40

Original

सयन किएँ देखा कपि तेही मंदिर महुँ न दीखि बैदेही भवन एक पुनि दीख सुहावा हरि मंदिर तहँ भिन्न बनावा

Verse 41

Original

रामायुध अंकित गृह सोभा बरनि न जाइ नव तुलसिका बृंद तहँ देखि हरष कपिराई

Verse 42

Original

लंका निसिचर निकर निवासा इहाँ कहाँ सज्जन कर बासा मन महुँ तरक करैं कपि लागा तेहीं समय बिभीषनु जागा

Verse 43

Original

राम राम तेहिं सुमिरन कीन्हा हृदयँ हरष कपि सज्जन चीन्हा एहि सन सठि करिहउँ पहिचानी साधु ते होइ न कारज हानी

Verse 44

Original

बिप्र रूप धरि बचन सुनाए सुनत बिभीषन उठि तहँ आए करि प्रनाम पूँछी कुसलाई बिप्र कहहु निज कथा बुझाई

Verse 45

Original

(जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम) (जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम)

Verse 46

Original

की तुम्ह हरि दासन्ह महँ कोई मोरें हृदय प्रीति अति होई की तुम्ह रामु दीन अनुरागी आयहु मोहि करन बड़भागी

Verse 47

Original

तब हनुमंत कही सब राम कथा निज नाम सुनत जुगल तन पुलक मन मगन सुमिरि गुन ग्राम

Verse 48

Original

सुनहु पवनसुत रहनि हमारी जिमि दसनन्हि महुँ जीभ बिचारी तात कबहुँ मोहि जानि अनाथा करिहहिं कृपा भानुकुल नाथा

Verse 49

Original

तामस तनु कछु साधन नाहीं प्रीत न पद सरोज मन माहीं अब मोहि भा भरोस हनुमंता बिनु हरिकृपा मिलहिं नहिं संता

Verse 50

Original

जौं रघुबीर अनुग्रह कीन्हा तौ तुम्ह मोहि दरसु हठि दीन्हा सुनहु बिभीषन प्रभु कै रीती करहिं सदा सेवक पर प्रीति

Verse 51

Original

(जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम) (जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम)

Verse 52

Original

कहहु कवन मैं परम कुलीना कपि चंचल सबहीं बिधि हीना प्रात लेइ जो नाम हमारा तेहि दिन ताहि न मिलै अहारा

Verse 53

Original

अस मैं अधम सखा सुनु मोहू पर रघुबीर कीन्हीं कृपा सुमिरि गुन भरे बिलोचन नीर

Verse 54

Original

जानतहूँ अस स्वामि बिसारी फिरहिं ते काहे न होहिं दुखारी एहि बिधि कहत राम गुन ग्रामा पावा अनिर्बाच्य बिश्रामा

Verse 55

Original

पुनि सब कथा बिभीषन कही जेहि बिधि जनकसुता तहँ रही तब हनुमंत कहा सुनु भ्राता देखी चहउँ जानकी माता

Verse 56

Original

जुगुति बिभीषन सकल सुनाई चलेउ पवन सुत बिदा कराई करि सोइ रूप गयउ पुनि तहवाँ बन असोक सीता रह जहवाँ

Verse 57

Original

(जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम) (जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम)

Verse 58

Original

देखि मनहि महुँ कीन्ह प्रनामा बैठेहिं बीति जात निसि जामा कृस तनु सीस जटा एक बेनी जपति हृदयँ रघुपति गुन श्रेनी

Verse 59

Original

निज पद नयन दिएँ मन राम पद कमल लीन परम दुखी भा पवनसुत देखि जानकी दीन

Verse 60

Original

तरु पल्लव महँ रहा लुकाई करइ बिचार करौं का भाई तेहि अवसर रावनु तहँ आवा संग नारि बहु किएँ बनावा

Verse 61

Original

बहु बिधि खल सीतहि समुझावा साम दान भय भेद देखावा कह रावनु सुनु सुमुखि सयानी मंदोदरी आदि सब रानी

Verse 62

Original

तव अनुचरीं करउँ पन मोरा एक बार बिलोकु मम ओरा तृन धरि ओट कहति बैदेही सुमिरि अवधपति परम सनेही

Verse 63

Original

(जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम) (जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम)

Verse 64

Original

सुनु दसमुख खद्योत प्रकासा कबहुँ कि नलिनी करइ बिकासा अस मन समुझु कहति जानकी खल सुधि नहिं रघुबीर बान की

Verse 65

Original

सठ सूनें हरि आनेहि मोही अधम निलज्ज लाज नहिं तोही

Verse 66

Original

आपुहि सुनि खद्योत सम रामहि भानु समान परुष बचन सुनि काढ़ि असि बोला अति खिसिआन

Verse 67

Original

सीता तैं मम कृत अपमाना कटिहउँ तव सिर कठिन कृपाना नाहिं त सपदि मानु मम बानी सुमुखि होति न त जीवन हानी

Verse 68

Original

स्याम सरोज दाम सम सुंदर प्रभु भुज करि कर सम दसकंधर सो भुज कंठ कि तव असि घोरा सुनु सठ अस प्रवान पन मोरा

Verse 69

Original

चंद्रहास हरु मम परितापं रघुपति बिरह अनल संजातं सीतल निसित बहसि बर धारा कह सीता हरु मम दु:ख भारा

Verse 70

Original

(जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम) (जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम)

Verse 71

Original

सुनत बचन पुनि मारन धावा मयतनयाँ कहि नीति बुझावा कहेसि सकल निसिचरिन्ह बोलाई सीतहि बहु बिधि त्रासहु जाई

Verse 72

Original

मास दिवस महुँ कहा न माना तौ मैं मारबि काढ़ि कृपाना

Verse 73

Original

भवन गयउ दसकंधर इहाँ पिसाचिनि बृंद सीतहि त्रास देखावहिं धरहिं रूप बहु मंद

Verse 74

Original

त्रिजटा नाम राच्छसी एका राम चरन रति निपुन बिबेका सबन्हौ बोलि सुनाएसि सपना सीतहि सेइ करहु हित अपना

Verse 75

Original

सपनें बानर लंका जारी जातुधान सेना सब मारी खर आरूढ़ नगन दससीसा मुंडित सिर खंडित भुज बीसा

Verse 76

Original

एहि बिधि सो दच्छिन दिसि जाई लंका मनहुँ बिभीषन पाई नगर फिरी रघुबीर दोहाई तब प्रभु सीता बोलि पठाई

Verse 77

Original

(जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम) (जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम)

Verse 78

Original

यह सपना मैं कहउँ पुकारी होइहि सत्य गएँ दिन चारी तासु बचन सुनि ते सब डरीं जनकसुता के चरनन्हि परीं

Verse 79

Original

जहँ तहँ गईं सकल तब सीता कर मन सोच मास दिवस बीतें मोहि मारिहि निसिचर पोच

Verse 80

Original

त्रिजटा सन बोलीं कर जोरी मातु बिपति संगिनि तैं मोरी तजौं देह करु बेगि उपाई दुसह बिरहु अब नहिं सहि जाई

Verse 81

Original

आनि काठ रचु चिता बनाई मातु अनल पुनि देहि लगाई सत्य करहि मम प्रीति सयानी सुनै को श्रवन सूल सम बानी

Verse 82

Original

सुनत बचन पद गहि समुझाएसि प्रभु प्रताप बल सुजसु सुनाएसि निसि न अनल मिल सुनु सुकुमारी अस कहि सो निज भवन सिधारी

Verse 83

Original

(जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम) (जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम)

Verse 84

Original

कह सीता बिधि भा प्रतिकूला मिलिहि न पावक मिटिहि न सूला देखिअत प्रगट गगन अंगारा अवनि न आवत एकउ तारा

Verse 85

Original

पावकमय ससि स्रवत न आगी मानहुँ मोहि जानि हतभागी सुनहि बिनय मम बिटप असोक सत्य नाम करु हरु मम सोका

Verse 86

Original

नूतन किसलय अनल समाना देहि अगिनि जनि करहि निदाना देखि परम बिरहाकुल सीता सो छन कपिहि कलप सम बीता

Verse 87

Original

कपि करि हृदयँ बिचार दीन्हि मुद्रिका डारि तब जनु असोक अंगार दीन्ह हरषि उठि कर गहेउ

Rattan Mohan Sharma

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