Sunderkand Path - Part. 1
Complete lyrics with original text, transliteration, and meaning, 87 sections
Sunderkand Path - Complete Recitation
Original
(शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं) (ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम्) (रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरुं मायामनुष्यं हरिं) (वन्देऽहं करुणाकरं रघुवरं भूपालचूडामणिम्)
(नान्या स्पृहा रघुपते हृदयेऽस्मदीये)
Original
(सत्यं वदामि च भवानखिलान्तरात्मा) (भक्तिं प्रयच्छ रघुपुंगव निर्भरां मे) (कामादिदोषरहितं कुरु मानसं च)
(अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं)
Original
(दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्) (सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं) (रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि)
Verse 4
Original
जामवंत के बचन सुहाए सुनि हनुमंत हृदय अति भाए तब लगि मोहि परिखेहु तुम्ह भाई सहि दु:ख कंद मूल फल खाई
Verse 5
Original
जब लगि आवौं सीतहि देखी होइहि काजु मोहि हरष बिसेषी यह कहि नाइ सबन्हि कहुँ माथा चलेउ हरषि हियँ धरि रघुनाथा
Verse 6
Original
सिंधु तीर एक भूधर सुंदर कौतुक कूदि चढ़ेउ ता ऊपर बार-बार रघुबीर सँभारी तरकेउ पवनतनय बल भारी
Verse 7
Original
(जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम) (जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम)
Verse 8
Original
जेहिं गिरि चरन देइ हनुमंता चलेउ सो गा पाताल तुरंता जिमि अमोघ रघुपति कर बाना एही भाँति चलेउ हनुमाना
Verse 9
Original
जलनिधि रघुपति दूत बिचारी तैं मैनाक होहि श्रम हारी
Verse 10
Original
हनूमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह प्रनाम राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ बिश्राम
Verse 11
Original
जात पवनसुत देवन्ह देखा जानैं कहुँ बल बुद्धि बिसेषा सुरसा नाम अहिन्ह कै माता पठइन्हि आइ कही तेहिं बाता
Verse 12
Original
आजु सुरन्ह मोहि दीन्ह अहारा सुनत बचन कह पवनकुमारा राम काजु करि फिरि मैं आवौं सीता कइ सुधि प्रभुहि सुनावौं
Verse 13
Original
तब तव बदन पैठिहउँ आई सत्य कहउँ मोहि जान दे माई कवनेहुँ जतन देइ नहिं जाना ग्रससि न मोहि कहेउ हनुमाना
Verse 14
Original
(जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम) (जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम)
Verse 15
Original
जोजन भरि तेहिं बदनु पसारा कपि तनु कीन्ह दुगुन बिस्तारा सोरह जोजन मुख तेहिं ठयऊ तुरत पवनसुत बत्तिस भयऊ
Verse 16
Original
जस जस सुरसा बदनु बढ़ावा तासु दून कपि रूप देखावा सत जोजन तेहिं आनन कीन्हा अति लघु रूप पवनसुत लीन्हा
Verse 17
Original
बदन पइठि पुनि बाहेर आवा मागा बिदा ताहि सिरु नावा मोहि सुरन्ह जेहि लागि पठावा बुधि बल मरमु तोर मैं पावा
Verse 18
Original
राम काजु सबु करिहहु तुम्ह बल बुद्धि निधान आसिष देइ गई सो हरषि चलेउ हनुमान
Verse 19
Original
निसिचरि एक सिंधु महुँ रहई करि माया नभु के खग गहई जीव जंतु जे गगन उड़ाहीं जल बिलोकि तिन्ह कै परिछाहीं
Verse 20
Original
गहइ छाहँ सक सो न उड़ाई एहि बिधि सदा गगनचर खाई सोइ छल हनूमान् कहँ कीन्हा तासु कपटु कपि तुरतहिं चीन्हा
Verse 21
Original
ताहि मारि मारुतसुत बीरा बारिधि पार गयउ मतिधीरा तहाँ जाइ देखी बन सोभा गुंजत चंचरीक मधु लोभा
Verse 22
Original
(जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम) (जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम)
Verse 23
Original
नाना तरु फल फूल सुहाए खग मृग बृंद देखि मन भाए सैल बिसाल देखि एक आगें ता पर धाइ चढ़ेउ भय त्यागें
Verse 24
Original
उमा न कछु कपि कै अधिकाई प्रभु प्रताप जो कालहि खाई गिरि पर चढ़ि लंका तेहिं देखी कहि न जाइ अति दुर्ग बिसेषी
Verse 25
Original
अति उतंग जलनिधि चहुँ पासा कनक कोट कर परम प्रकासा
Verse 26
Original
कनक कोटि बिचित्र मनि कृत सुंदरायतना घना चउहट्ट हट्ट सुबट्ट बीथीं चारु पुर बहु बिधि बना गज बाजि खच्चर निकर पदचर रथ बरूथन्हि को गनै बहुरूप निसिचर जूथ अतिबल सेन बरनत नहिं बनै
Verse 27
Original
बन बाग उपबन बाटिका सर कूप बापीं सोहहीं नर नाग सुर गंधर्ब कन्या रूप मुनि मन मोहहीं कहुँ माल देह बिसाल सैल समान अतिबल गर्जहीं नाना अखारेन्ह भिरहिं बहुबिधि एक एकन्ह तर्जहीं
Verse 28
Original
करि जतन भट कोटिन्ह बिकट तन नगर चहुँ दिसि रच्छहीं कहुँ महिष मानुष धेनु खर अज खल निसाचर भच्छहीं एहि लागि तुलसीदास इन्ह की कथा कछु एक है कही रघुबीर सर तीरथ सरीरन्हि त्यागि गति पैहहिं सही
Verse 29
Original
पुर रखवारे देखि बहु कपि मन कीन्ह बिचार अति लघु रूप धरों निसि नगर करौं पइसार
Verse 30
Original
मसक समान रूप कपि धरी लंकहि चलेउ सुमिरि नरहरी नाम लंकिनी एक निसिचरी सो कह चलेसि मोहि निंदरी
Verse 31
Original
जानेहि नहीं मरमु सठ मोरा मोर अहार जहाँ लगि चोरा मुठिका एक महा कपि हनी रुधिर बमत धरनीं ढनमनी
Verse 32
Original
पुनि संभारि उठी सो लंका जोरि पानि कर बिनय ससंका जब रावनहि ब्रह्म बर दीन्हा चलत बिरंच कहा मोहि चीन्हा
Verse 33
Original
(जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम) (जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम)
Verse 34
Original
बिकल होसि तैं कपि कें मारे तब जानेसु निसिचर संघारे तात मोर अति पुन्य बहूता देखेउँ नयन राम कर दूता
Verse 35
Original
तात स्वर्ग अपबर्ग सुख धरिअ तुला एक अंग तूल न ताहि सकल मिलि जो सुख लव सतसंग
Verse 36
Original
प्रबिसि नगर कीजे सब काजा हृदय राखि कोसलपुर राजा गरल सुधा रिपु करहिं मिताई गोपद सिंधु अनल सितलाई
Verse 37
Original
गरुड़ सुमेरु रेनु सम ताही राम कृपा करि चितवा जाही अति लघु रूप धरेउ हनुमाना पैठा नगर सुमिरि भगवाना
Verse 38
Original
मंदिर मंदिर प्रति करि सोधा देखे जहँ तहँ अगनित जोधा गयउ दसानन मंदिर माहीं अति बिचित्र कहि जात सो नाहीं
Verse 39
Original
(जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम) (जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम)
Verse 40
Original
सयन किएँ देखा कपि तेही मंदिर महुँ न दीखि बैदेही भवन एक पुनि दीख सुहावा हरि मंदिर तहँ भिन्न बनावा
Verse 41
Original
रामायुध अंकित गृह सोभा बरनि न जाइ नव तुलसिका बृंद तहँ देखि हरष कपिराई
Verse 42
Original
लंका निसिचर निकर निवासा इहाँ कहाँ सज्जन कर बासा मन महुँ तरक करैं कपि लागा तेहीं समय बिभीषनु जागा
Verse 43
Original
राम राम तेहिं सुमिरन कीन्हा हृदयँ हरष कपि सज्जन चीन्हा एहि सन सठि करिहउँ पहिचानी साधु ते होइ न कारज हानी
Verse 44
Original
बिप्र रूप धरि बचन सुनाए सुनत बिभीषन उठि तहँ आए करि प्रनाम पूँछी कुसलाई बिप्र कहहु निज कथा बुझाई
Verse 45
Original
(जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम) (जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम)
Verse 46
Original
की तुम्ह हरि दासन्ह महँ कोई मोरें हृदय प्रीति अति होई की तुम्ह रामु दीन अनुरागी आयहु मोहि करन बड़भागी
Verse 47
Original
तब हनुमंत कही सब राम कथा निज नाम सुनत जुगल तन पुलक मन मगन सुमिरि गुन ग्राम
Verse 48
Original
सुनहु पवनसुत रहनि हमारी जिमि दसनन्हि महुँ जीभ बिचारी तात कबहुँ मोहि जानि अनाथा करिहहिं कृपा भानुकुल नाथा
Verse 49
Original
तामस तनु कछु साधन नाहीं प्रीत न पद सरोज मन माहीं अब मोहि भा भरोस हनुमंता बिनु हरिकृपा मिलहिं नहिं संता
Verse 50
Original
जौं रघुबीर अनुग्रह कीन्हा तौ तुम्ह मोहि दरसु हठि दीन्हा सुनहु बिभीषन प्रभु कै रीती करहिं सदा सेवक पर प्रीति
Verse 51
Original
(जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम) (जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम)
Verse 52
Original
कहहु कवन मैं परम कुलीना कपि चंचल सबहीं बिधि हीना प्रात लेइ जो नाम हमारा तेहि दिन ताहि न मिलै अहारा
Verse 53
Original
अस मैं अधम सखा सुनु मोहू पर रघुबीर कीन्हीं कृपा सुमिरि गुन भरे बिलोचन नीर
Verse 54
Original
जानतहूँ अस स्वामि बिसारी फिरहिं ते काहे न होहिं दुखारी एहि बिधि कहत राम गुन ग्रामा पावा अनिर्बाच्य बिश्रामा
Verse 55
Original
पुनि सब कथा बिभीषन कही जेहि बिधि जनकसुता तहँ रही तब हनुमंत कहा सुनु भ्राता देखी चहउँ जानकी माता
Verse 56
Original
जुगुति बिभीषन सकल सुनाई चलेउ पवन सुत बिदा कराई करि सोइ रूप गयउ पुनि तहवाँ बन असोक सीता रह जहवाँ
Verse 57
Original
(जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम) (जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम)
Verse 58
Original
देखि मनहि महुँ कीन्ह प्रनामा बैठेहिं बीति जात निसि जामा कृस तनु सीस जटा एक बेनी जपति हृदयँ रघुपति गुन श्रेनी
Verse 59
Original
निज पद नयन दिएँ मन राम पद कमल लीन परम दुखी भा पवनसुत देखि जानकी दीन
Verse 60
Original
तरु पल्लव महँ रहा लुकाई करइ बिचार करौं का भाई तेहि अवसर रावनु तहँ आवा संग नारि बहु किएँ बनावा
Verse 61
Original
बहु बिधि खल सीतहि समुझावा साम दान भय भेद देखावा कह रावनु सुनु सुमुखि सयानी मंदोदरी आदि सब रानी
Verse 62
Original
तव अनुचरीं करउँ पन मोरा एक बार बिलोकु मम ओरा तृन धरि ओट कहति बैदेही सुमिरि अवधपति परम सनेही
Verse 63
Original
(जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम) (जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम)
Verse 64
Original
सुनु दसमुख खद्योत प्रकासा कबहुँ कि नलिनी करइ बिकासा अस मन समुझु कहति जानकी खल सुधि नहिं रघुबीर बान की
Verse 65
Original
सठ सूनें हरि आनेहि मोही अधम निलज्ज लाज नहिं तोही
Verse 66
Original
आपुहि सुनि खद्योत सम रामहि भानु समान परुष बचन सुनि काढ़ि असि बोला अति खिसिआन
Verse 67
Original
सीता तैं मम कृत अपमाना कटिहउँ तव सिर कठिन कृपाना नाहिं त सपदि मानु मम बानी सुमुखि होति न त जीवन हानी
Verse 68
Original
स्याम सरोज दाम सम सुंदर प्रभु भुज करि कर सम दसकंधर सो भुज कंठ कि तव असि घोरा सुनु सठ अस प्रवान पन मोरा
Verse 69
Original
चंद्रहास हरु मम परितापं रघुपति बिरह अनल संजातं सीतल निसित बहसि बर धारा कह सीता हरु मम दु:ख भारा
Verse 70
Original
(जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम) (जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम)
Verse 71
Original
सुनत बचन पुनि मारन धावा मयतनयाँ कहि नीति बुझावा कहेसि सकल निसिचरिन्ह बोलाई सीतहि बहु बिधि त्रासहु जाई
Verse 72
Original
मास दिवस महुँ कहा न माना तौ मैं मारबि काढ़ि कृपाना
Verse 73
Original
भवन गयउ दसकंधर इहाँ पिसाचिनि बृंद सीतहि त्रास देखावहिं धरहिं रूप बहु मंद
Verse 74
Original
त्रिजटा नाम राच्छसी एका राम चरन रति निपुन बिबेका सबन्हौ बोलि सुनाएसि सपना सीतहि सेइ करहु हित अपना
Verse 75
Original
सपनें बानर लंका जारी जातुधान सेना सब मारी खर आरूढ़ नगन दससीसा मुंडित सिर खंडित भुज बीसा
Verse 76
Original
एहि बिधि सो दच्छिन दिसि जाई लंका मनहुँ बिभीषन पाई नगर फिरी रघुबीर दोहाई तब प्रभु सीता बोलि पठाई
Verse 77
Original
(जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम) (जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम)
Verse 78
Original
यह सपना मैं कहउँ पुकारी होइहि सत्य गएँ दिन चारी तासु बचन सुनि ते सब डरीं जनकसुता के चरनन्हि परीं
Verse 79
Original
जहँ तहँ गईं सकल तब सीता कर मन सोच मास दिवस बीतें मोहि मारिहि निसिचर पोच
Verse 80
Original
त्रिजटा सन बोलीं कर जोरी मातु बिपति संगिनि तैं मोरी तजौं देह करु बेगि उपाई दुसह बिरहु अब नहिं सहि जाई
Verse 81
Original
आनि काठ रचु चिता बनाई मातु अनल पुनि देहि लगाई सत्य करहि मम प्रीति सयानी सुनै को श्रवन सूल सम बानी
Verse 82
Original
सुनत बचन पद गहि समुझाएसि प्रभु प्रताप बल सुजसु सुनाएसि निसि न अनल मिल सुनु सुकुमारी अस कहि सो निज भवन सिधारी
Verse 83
Original
(जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम) (जय सिया-राम, बोलो, जय सिया-राम)
Verse 84
Original
कह सीता बिधि भा प्रतिकूला मिलिहि न पावक मिटिहि न सूला देखिअत प्रगट गगन अंगारा अवनि न आवत एकउ तारा
Verse 85
Original
पावकमय ससि स्रवत न आगी मानहुँ मोहि जानि हतभागी सुनहि बिनय मम बिटप असोक सत्य नाम करु हरु मम सोका
Verse 86
Original
नूतन किसलय अनल समाना देहि अगिनि जनि करहि निदाना देखि परम बिरहाकुल सीता सो छन कपिहि कलप सम बीता
Verse 87
Original
कपि करि हृदयँ बिचार दीन्हि मुद्रिका डारि तब जनु असोक अंगार दीन्ह हरषि उठि कर गहेउ