पुत्रदा एकादशी (पौष) — महत्व और कथा

पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाने वाला पुत्रदा एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है।

By Sanatan Hindu1 min readUpdated 9 August 2026Audio available
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Putrada Ekadashi (Pausha) — Significance and Katha

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परिचय

आध्यात्मिक लाभों के अलावा, पुत्रदा एकादशी को पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने का भी एक महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। श्रद्धालु मिलकर व्रत रखते हैं, भोजन साझा करते हैं और पूजा में भाग लेते हैं। यह व्रत श्रद्धालुओं के लिए अपने कर्मों पर विचार करने, अपने पापों के लिए क्षमा मांगने और एक नई शुरुआत करने का भी अवसर है। यह व्रत बड़े उत्साह और भक्ति के साथ रखा जाता है, और इससे जुड़े अनुष्ठान अत्यंत शुभ माने जाते हैं। यह व्रत हिंदू धर्म में आस्था, भक्ति और पारिवारिक मूल्यों के महत्व का स्मरण कराता है।

महत्व

पुत्रदा एकादशी का विशेष महत्व है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि यह परिवार में शांति, समृद्धि और खुशहाली लाती है। निसंतान दंपत्तियों के लिए भी यह व्रत रखना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इससे उन्हें संतान की प्राप्ति होती है।

करने का सर्वोत्तम समय

पुत्रदा एकादशी व्रत करने का सबसे उत्तम समय पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है।

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आवश्यक सामग्री

तुलसी के पत्ते
अगरबत्ती
दीपक
फूल
फल
नैवेद्य

तैयारी के चरण

  1. 1प्रातःकाल जल्दी उठें
  2. 2स्नान करें
  3. 3भगवान विष्णु की प्रार्थना करें
  4. 4व्रत का संकल्प लें और पालन करें
  5. 5पूजा संपन्न करें

चरण-दर-चरण विधि

  1. 1सूर्योदय के समय उठें और स्नान करें
  2. 2भगवान विष्णु की प्रार्थना करें और तुलसी पत्र, अगरबत्ती तथा दीपक से उनकी पूजा करें
  3. 3व्रत का पालन करें, जो पूर्ण उपवास या फलाहार उपवास हो सकता है
  4. 4पूजा करें और भगवान विष्णु को नैवेद्य अर्पित करें
  5. 5अगले दिन प्रार्थना और पूजा करने के पश्चात् व्रत का पारण करें

मंत्र

Vishnu Sahasranama

विष्णुसहस्रनाम

Vishnu Sahasranama

अर्थ: A thousand names of Lord Vishnu

Om Namo Narayanaya

ओम् नमो नारायणाय

Om Namo Narayanaya

अर्थ: Salutations to Lord Narayana

Om Shri Vishnuaya Namaha

ओम् श्री विष्णवे नमः

Om Shri Vishnave Namaha

अर्थ: Salutations to Lord Vishnu

व्रत के नियम

  • एकादशी तिथि पर व्रत का पालन करें
  • पूजा करें और भगवान विष्णु को नैवेद्य अर्पित करें
  • व्रत के दौरान अनाज और दालों के सेवन से बचें
  • मांसाहार और मदिरा से दूर रहें

करें

  • प्रातःकाल जल्दी उठें और स्नान करें
  • भगवान विष्णु की प्रार्थना करें और तुलसी पत्र, अगरबत्ती तथा दीपक से उनकी पूजा करें
  • व्रत का पालन करें और विधि-विधान से पूजा करें

न करें

  • व्रत के दौरान अनाज और दालों का सेवन न करें
  • मांसाहार और मदिरा का सेवन न करें
  • दिन के समय न सोएं

सामान्य गलतियाँ

  • प्रातःकाल जल्दी न उठना
  • पूजा करने से पूर्व स्नान न करना
  • व्रत न रखना या व्रत के दौरान अनाज व दालों का सेवन कर लेना

क्षेत्रीय विविधताएँ

  • कुछ क्षेत्रों में यह व्रत पूर्ण निर्जला या केवल जलाहार के साथ रखा जाता है, जबकि अन्य क्षेत्रों में इसे फलाहारी उपवास के रूप में रखा जाता है
  • कुछ क्षेत्रों में पूजा विशेष प्रकार के नैवेद्य के साथ की जाती है, जबकि अन्य क्षेत्रों में भिन्न प्रकार के नैवेद्य का उपयोग किया जाता है

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुत्रदा एकादशी का क्या महत्व है?
पुत्रदा एकादशी का विशेष महत्व है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि यह परिवार में शांति, समृद्धि और खुशहाली लाती है। निसंतान दंपत्तियों के लिए भी यह व्रत रखना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इससे उन्हें संतान की प्राप्ति होती है।
पुत्रदा एकादशी का व्रत कैसे रखा जाता है?
पुत्रदा एकादशी व्रत का पालन प्रातःकाल जल्दी उठकर, स्नान करके, भगवान विष्णु की प्रार्थना करके, उपवास रखकर और विधि-विधान से पूजा करके किया जाता है।
पुत्रदा एकादशी का व्रत रखने के क्या लाभ हैं?
पुत्रदा एकादशी का व्रत रखने से परिवार में शांति, समृद्धि और खुशहाली आती है, तथा निसंतान दंपत्तियों को संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है।

संदर्भ और पारंपरिक टिप्पणियाँ

  • पुत्रदा एकादशी की कथा का वर्णन भविष्योत्तर पुराण में मिलता है
  • यह व्रत पौष माह के दौरान रखा जाता है, जो आमतौर पर ग्रेगोरियन कैलेंडर के दिसंबर या जनवरी महीने में आता है

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