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भैरव जी की आरती — संपूर्ण बोल, महत्व, विधि और लाभ

भैरव जी की आरती, इसका महत्व और लाभ चरण-दर-चरण विधि और संपूर्ण बोल के साथ जानें।

By Sanatan Hindu2 min readUpdated 16 October 2026Audio available
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Bhairav — Hindu Deity

परिचय

भैरव जी की आरती भगवान शिव के उग्र स्वरूप भगवान भैरव को समर्पित एक अत्यंत पावन हिंदू अनुष्ठान है। यह आरती भगवान भैरव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए की जाती है, जो अपने भक्तों को बुरी आत्माओं और नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा प्रदान करते हैं। यह आरती प्रायः शाम के समय सूर्यास्त के बाद की जाती है, जिसमें दीपक प्रज्वलित किए जाते हैं तथा पुष्प और प्रसाद अर्पित किया जाता है। इस लेख में, हम भैरव जी की आरती के महत्व, विधि और लाभों के साथ-साथ इसके संपूर्ण बोल पर विस्तार से चर्चा करेंगे। भैरव जी की आरती हिंदू पूजा पद्धति, विशेष रूप से शैव परंपरा का एक अभिन्न अंग है। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त इसे पूर्ण भक्ति और श्रद्धा के साथ करते हैं, उनके जीवन में शांति, समृद्धि और सुरक्षा आती है। यह आरती भगवान भैरव के प्रति भक्त के प्रेम और निष्ठा की एक सुंदर अभिव्यक्ति है, और इसके पाठ से मन तथा आत्मा की शुद्धि होती है। भैरव जी की आरती का महत्व भक्त को भगवान भैरव की दिव्य ऊर्जा से जोड़ने में निहित है, जिन्हें ब्रह्मांड के रक्षक के रूप में पूजा जाता है।

महत्व

भैरव जी की आरती का विशेष महत्व है क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करने में सहायता करती है, सुख-शांति व समृद्धि लाती है और भक्तों को सुरक्षा प्रदान करती है। यह भी माना जाता है कि यह आरती भक्त को भगवान भैरव के और अधिक निकट लाती है, जिनकी पूजा एक उग्र और शक्तिशाली देवता के रूप में की जाती है।

आरती का सर्वोत्तम समय

भैरव जी की आरती करने का सबसे उत्तम समय शाम का, सूर्यास्त के बाद होता है, जब आकाश में तारे दिखाई देने लगते हैं।

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आरती कैसे करें

  1. 1सर्वप्रथम दीपक और अगरबत्ती जलाकर शुरुआत करें
  2. 2भगवान भैरव को पुष्प और प्रसाद अर्पित करें
  3. 3भक्ति और श्रद्धा के साथ भैरव जी की आरती का पाठ करें
  4. 4शुद्ध हृदय और एकाग्र मन से आरती करें
  5. 5भगवान भैरव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए आरती संपन्न करें

मंत्र

Bhairav Ji Ki Aarti

जय जय भैरव भूतनाथ, जय जय भैरव भूतनाथ

Jaya Jaya Bhairava Bhutanatha, Jaya Jaya Bhairava Bhutanatha

अर्थ: Victory to Lord Bhairav, the Lord of the spirits, victory to Lord Bhairav, the Lord of the spirits

Bhairav Ji Ki Aarti

तेरी महिमा अपरम्पार, तेरी महिमा अपरम्पार

Teri Mahima Aprampaar, Teri Mahima Aprampaar

अर्थ: Your glory is immeasurable, your glory is immeasurable

Bhairav Ji Ki Aarti

तुम्हारी कृपा से हम जीवन, तुम्हारी कृपा से हम जीवन

Tumhari Krupa Se Hum Jeevan, Tumhari Krupa Se Hum Jeevan

अर्थ: We live by your grace, we live by your grace

करें

  • ✓पूरी भक्ति और विश्वास के साथ आरती करें
  • ✓भगवान भैरव को पुष्प और प्रसाद अर्पित करें
  • ✓दीपक और अगरबत्ती प्रज्वलित करें
  • ✓शुद्ध हृदय और मन से भैरव जी की आरती का पाठ करें

न करें

  • ✗अशुद्ध या अपवित्र मन से आरती न करें
  • ✗आरती के दिन मांसाहारी भोजन या नशीले पदार्थों का सेवन न करें
  • ✗आरती को छोड़ें नहीं और न ही आलस्यपूर्वक करें
  • ✗आरती करते समय दूसरों को बाधा न पहुंचाएं

सामान्य गलतियाँ

  • •प्रतिदिन एक निश्चित समय पर आरती न करना
  • •आरती के दिन मांसाहारी भोजन या नशीले पदार्थों का सेवन करना
  • •आरती के दिन उपवास न रखना या केवल शाकाहारी भोजन का नियम न निभाना
  • •भक्ति और विश्वास के बिना आरती करना

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भैरव जी की आरती करने का सबसे उत्तम समय क्या है?▾
भैरव जी की आरती करने का सबसे उत्तम समय शाम का, सूर्यास्त के बाद होता है, जब आकाश में तारे दिखाई देने लगते हैं।
भैरव जी की आरती करने के क्या लाभ हैं?▾
भैरव जी की आरती करने से नकारात्मक ऊर्जाएं दूर होती हैं, सुख-शांति व समृद्धि की प्राप्ति होती है और भक्तों को सभी प्रकार के अनिष्टों से सुरक्षा मिलती है।

संदर्भ और पारंपरिक टिप्पणियाँ

  • •भैरव जी की आरती का उल्लेख प्राचीन हिंदू धर्मग्रंथों जैसे पुराणों और तंत्र ग्रंथों में मिलता है
  • •माना जाता है कि इस आरती की रचना महान दार्शनिक और संत आदि शंकराचार्य जी ने की थी
  • •यह आरती हिंदू मंदिरों और घरों में, विशेष रूप से शैव परंपरा में, अत्यंत श्रद्धा से की जाती है

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