पितृ जी की आरती: इसका महत्व समझना और भक्ति के साथ इसे करना
पितृ जी की आरती, इसका महत्व, और पूर्वजों के साथ सार्थक संबंध के लिए चरण-दर-चरण विधि सीखें।
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Sunday, 27 September 2026· in 27 days
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परिचय
महत्व
आरती का सर्वोत्तम समय
आरती कैसे करें
- 1पूर्वजों का आह्वान करके और उनका आशीर्वाद लेकर शुरुआत करें
- 2भक्ति और ईमानदारी के साथ पितृ जी की आरती के मंत्रों का पाठ करें
- 3पूर्वजों को पवित्र जल, फूल, फल और अन्य वस्तुएं अर्पित करें
- 4यदि लागू हो तो तर्पण समारोह करें
- 5पूर्वजों का आशीर्वाद और सुरक्षा मांगकर आरती समाप्त करें
मंत्र
Pitru Ji Ki Aarti
पितृ जी की आरती
Pitru Ji Ki Aarti
अर्थ: Aarti of the Ancestors
First Verse
जय जय पितृ देव जय जय पितृ भव
Jaya Jaya Pitru Deva Jaya Jaya Pitru Bhava
अर्थ: Victory to the ancestors, victory to the ancestors
Second Verse
पितृ देव तारयंते तरयंते पितृ देव
Pitru Deva Tarayante Tarayante Pitru Deva
अर्थ: The ancestors help us cross the ocean of life
Third Verse
पितृ देव सुखं भुंजंते भुंजंते पितृ देव
Pitru Deva Sukham Bhunjante Bhunjante Pitru Deva
अर्थ: The ancestors enjoy happiness and bliss
करें
- ✓भक्ति और ईमानदारी के साथ आरती करें
- ✓पूर्वजों को फूल, फल और अन्य वस्तुएं अर्पित करें
- ✓पूर्वजों का आशीर्वाद और सुरक्षा मांगें
न करें
- ✗भटके हुए या अशुद्ध मन से आरती न करें
- ✗आरती के दौरान बहस या झगड़ा न करें
- ✗पूर्वजों के आशीर्वाद की उपेक्षा या अनदेखी न करें
सामान्य गलतियाँ
- •सही विधि या प्रक्रिया का पालन न करना
- •आवश्यक सामग्री या वस्तुओं का उपयोग न करना
- •भक्ति और ईमानदारी के साथ पूर्वजों का आशीर्वाद न मांगना
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पितृ जी की आरती का क्या महत्व है?▾
पितृ जी की आरती करने का सबसे अच्छा समय कब है?▾
लोकप्रिय टूल
संदर्भ और पारंपरिक टिप्पणियाँ
- •पितृ जी की आरती का उल्लेख विभिन्न हिंदू ग्रंथों में है, जिनमें गरुड़ पुराण और महाभारत शामिल हैं
- •आरती का उल्लेख विभिन्न पारंपरिक ग्रंथों और टीकाओं में भी है
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