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Aarti Kunjbihari Ki

Complete lyrics with original text, transliteration, and meaning, 11 sections

Aarti Kunjbihari Ki - Aarti

Anuradha Paudwalaarti

Verse 1

Original

आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की

Verse 2

Original

आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की गले में बैजंती माला बजावै मुरली मधुर बाला श्रवण में कुण्डल झलकाला नंद के आनंद नंदलाला

Verse 3

Original

गगन सम अंग कांति काली राधिका चमक रही आली लतन में ठाढ़े बनमाली भ्रमर सी अलक कस्तूरी तिलक चंद्र सी झलक

Verse 4

Original

ललित छवि श्यामा प्यारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की

Verse 5

Original

कनकमय मोर मुकुट बिलसै देवता दरसन को तरसैं गगन सों सुमन रासि बरसै बजे मुरचंग मधुर मिरदंग ग्वालिन संग

Verse 6

Original

अतुल रति गोप कुमारी की श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की

Verse 7

Original

जहां ते प्रकट भई गंगा कलुष कली हारिणि श्री गंगा स्मरन ते होत मोह भंगा बसी शिव सीस जटा के बीच हरै अघ कीच

Verse 8

Original

चरन छवि श्रीबनवारी की श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की

Verse 9

Original

चमकती उज्ज्वल तट रेनू बज रही वृंदावन बेनू चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू हंसत मृदु मंद चांदनी चंद कटत भव फंद

Verse 10

Original

टेर सुन दीन भिखारी की श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की

Verse 11

Original

आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की

Anup Jalota

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