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Bhagavad Gita

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Bhagavad Gita

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Lyrics with Meaning

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Original

धर्म संकट, धर्म युद्ध जीवन बना करुक्षेत्र

Verse 2

Original

य एनं वेत्ति हन्तारं यश्चैनं मन्यते हतम् उभौ तौ न विजानीतो नायं हन्ति न हन्यते

Verse 3

Original

काया क्या है? केवल है माया धरती चाहे जो ऐसी है छाया अग्नि, अकाशा, वायु, जल, वसुधा बस पाँच तत्व का पिंजरा है काया

Verse 4

Original

न जायते म्रियते वा कदाचिन् नायं भूत्वा भविता वा न भूयः अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो न हन्यते हन्यमाने शरीरे

Verse 5

Original

इस पिंजरे में एक हंस है जकड़ा जो अजर-अमर है आत्मा कहलाया मृत्यु क्या है? केवल है माया उड़ गया रे हंसा अपने घर आया

Verse 6

Original

तू मौत का ग़म क्यूँ करे? प्रारब्ध से तू क्यूँ डरे? क्यूँ?

Verse 7

Original

ये आत्मा मेरी-तेरी, ये जन्म और मृत्यु सभी क्या सूर्य और क्या ये जमीं, समयचक्र से ही सब चली (धर्म युद्ध) तेरे वश में बस तेरा काम है, बस कर्म पर अधिकार है कर्म में ही तेरी शान है, कर्म तेरी पहचान है, बस कर्म

Verse 8

Original

चल छोड़ मन की कमजोरियाँ, रिश्तों की मजबूरियाँ जीवन संघर्ष से बचना ही क्या? जीवन संघर्ष से बचना ही क्या? जीवन संघर्ष से बचना ही क्या?

Verse 9

Original

अथ चेत्त्वमिमं धर्म्यं सङ्ग्रामं न करिष्यसि ततः स्वधर्मं कीर्तिं च हित्वा पापमवाप्स्यसि

Verse 10

Original

जीवन क्या है धूप और छाया, हंसा, क्यूँ दुनिया में आया? कर्तव्य अटल है, कर्म अटल, वो अपना कर्म करने आया (वो अपना कर्म करने आया)

Verse 11

Original

तेरे वश में बस तेरा काम है, बस कर्म पर अधिकार है कर्म में ही तेरी शान है, कर्म तेरी पहचान है, बस कर्म

Verse 12

Original

सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि

Verse 13

Original

क्या सही-गलत चुनने आया, जीवन का रण लड़ने आया सूरज की तरह हर अंधियारा, कर भस्म खुद ही जलने आया

Verse 14

Original

(सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ) (ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि

Verse 15

Original

चल छोड़ मन की कमजोरियाँ, रिश्तों की मजबूरियाँ जीवन संघर्ष से बचना ही क्या? जीवन संघर्ष से बचना ही क्या? जीवन संघर्ष से बचना ही क्या?

Verse 16

Original

धर्म संकट, धर्म युद्ध जीवन बना करुक्षेत्र

Vishal Khurana

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