Bhaye Pragat Kripala-Shriram Stuti-Balkand
Artist: Amrita Chaturvedi
Bhaye Pragat Kripala-Shriram Stuti-Balkand
Lyrics with Meaning
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भये प्रगट कृपाला, दीन दयाला, कौशल्या हितकारी हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप निहारी (भये प्रगट कृपाला, दीन दयाला, कौशल्या हितकारी) (हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप निहारी)
Verse 2
Original
भये प्रगट कृपाला, दीन दयाला, कौशल्या हितकारी हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप निहारी (भये प्रगट कृपाला, दीन दयाला, कौशल्या हितकारी) (हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप निहारी)
Verse 3
Original
लोचन अभिरामा, तन घनस्यामा, निज आयुध भुजचारी भूषण बनमाला, नयन विशाला, शोभा सिंधु खरारी (लोचन अभिरामा, तन घनस्यामा, निज आयुध भुजचारी) (भूषण बनमाला, नयन विशाला, शोभा सिंधु खरारी)
Verse 4
Original
भये प्रगट कृपाला, दीन दयाला, कौशल्या हितकारी हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप निहारी (भये प्रगट कृपाला, दीन दयाला, कौशल्या हितकारी) (हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप निहारी)
Verse 5
Original
कह दुई कर जोरी, अस्तुति तोरी, केहि विधि करूं अनंता माया गुन ग्याना तीत अमाना, वेद, पुरान भनंता (कह दुई कर जोरी, अस्तुति तोरी, केहि विधि करूं अनंता) (माया गुन ग्याना तीत अमाना, वेद, पुरान भनंता)
Verse 6
Original
भये प्रगट कृपाला, दीन दयाला, कौशल्या हितकारी हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप निहारी (भये प्रगट कृपाला, दीन दयाला, कौशल्या हितकारी) (हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप निहारी)
Verse 7
Original
करुणा सुख सागर, सब गुन आगर, जेहि गावहिं श्रुति संता सो मम हित कारी, जन अनुरागी, प्रगट भये श्रीकंता (करुणा सुख सागर, सब गुन आगर, जेहि गावहिं श्रुति संता) (सो मम हित कारी, जन अनुरागी, प्रगट भये श्रीकंता)
Verse 8
Original
भये प्रगट कृपाला, दीन दयाला, कौशल्या हितकारी हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप निहारी (भये प्रगट कृपाला, दीन दयाला, कौशल्या हितकारी) (हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप निहारी)
Verse 9
Original
ब्रह्मांड निकाया, निर्मित माया, रोम-रोम प्रति वेद कहे मम उर सो बासी, यह उपहासी, सुनत धीर मति थिर ना रहे (ब्रह्मांड निकाया, निर्मित माया, रोम-रोम प्रति वेद रहे) (मम उर सो बासी, यह उपहासी, सुनत धीर मति थिर ना रहे)
Verse 10
Original
भये प्रगट कृपाला, दीन दयाला, कौशल्या हितकारी हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप निहारी (भये प्रगट कृपाला, दीन दयाला, कौशल्या हितकारी) (हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप निहारी)
Verse 11
Original
उपजा जब ग्याना, प्रभु मुस्काना, चरित बहु विधि कीन्ह चहै कहि कथा सुनाई, मातु बुझाई, जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै (उपजा जब ग्याना, प्रभु मुस्काना, चरित बहु विधि कीन्ह चहै) (कहि कथा सुनाई, मातु बुझाई, जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै)
Verse 12
Original
भये प्रगट कृपाला, दीन दयाला, कौशल्या हितकारी हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप निहारी (भये प्रगट कृपाला, दीन दयाला, कौशल्या हितकारी) (हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप निहारी)
Verse 13
Original
माता पुनि बोली, सो मति डोली, तजहुँ तात यह रूपा कीजै शिशु लीला, अति प्रियशीला, यह सुख परम अनूपा (माता पुनि बोली, सो मति डोली, तजहुँ तात यह रूपा) (कीजै शिशु लीला, अति प्रियशीला, यह सुख परम अनूपा)
Verse 14
Original
भये प्रगट कृपाला, दीन दयाला, कौशल्या हितकारी हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप निहारी (भये प्रगट कृपाला, दीन दयाला, कौशल्या हितकारी) (हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप निहारी)
Verse 15
Original
सुनि वचन सुजाना, रोदन ठाना, होई बालक सुरभूपा यह चरित जे गावहिं, हरिपद पावहिं, ते ना परहिं भवकूपा (सुनि बचन सुजाना, रोदन ठाना, होई बालक सुरभूपा) (यह चरित जे गावहिं, हरिपद पावहिं, ते ना परहिं भवकूपा)
Verse 16
Original
भये प्रगट कृपाला, दीन दयाला, कौशल्या हितकारी हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप निहारी (भये प्रगट कृपाला, दीन दयाला, कौशल्या हितकारी) (हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप निहारी)
Verse 17
Original
भये प्रगट कृपाला, दीन दयाला, कौशल्या हितकारी हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप निहारी (भये प्रगट कृपाला, दीन दयाला, कौशल्या हितकारी) (हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप निहारी)
Verse 18
Original
(भये प्रगट कृपाला, दीन दयाला, कौशल्या हितकारी) (हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप निहारी) (भये प्रगट कृपाला, दीन दयाला, कौशल्या हितकारी) (हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप निहारी)
Tirpti Shakya