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Shani Chalisa

Artist: Ketan Patwardhan

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Shani Chalisa

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Lyrics with Meaning

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Original

जय जय श्री शनिदेव प्रभु सुनहु विनय महाराज करहु कृपा हे रवि तनय राखहु जन की लाज

Verse 2

Original

जयति जयति शनिदेव दयाला करत सदा भक्तन प्रतिपाला चारि भुजा, तनु श्याम विराजै माथे रतन मुकुट छबि छाजै

Verse 3

Original

परम विशाल मनोहर भाला टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला कुण्डल श्रवण चमाचम चमके हिय माल मुक्तन मणि दमके

Verse 4

Original

कर में गदा त्रिशूल कुठारा पल बिच करैं अरिहिं संहारा पिंगल, कृष्णो, छाया नन्दन यम, कोणस्थ, रौद्र, दुखभंजन

Verse 5

Original

सौरी, मन्द, शनी, दश नामा भानु पुत्र पूजहिं सब कामा जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं

Verse 6

Original

पर्वतहू तृण होई निहारत तृणहू को पर्वत करि डारत राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो

Verse 7

Original

बनहूँ में मृग कपट दिखाई मातु जानकी गई चुराई लखनहिं शक्ति विकल करिडारा मचिगा दल में हाहाकारा

Verse 8

Original

रावण की गति-मति बौराई रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई दियो कीट करि कंचन लंका बजि बजरंग बीर की डंका

Verse 9

Original

नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा चित्र मयूर निगलि गै हारा हार नौलखा लाग्यो चोरी हाथ पैर डरवायो तोरी

Verse 10

Original

भारी दशा निकृष्ट दिखायो तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो विनय राग दीपक महं कीन्हयों तब प्रसन्न प्रभु है सुख दीन्हयों

Verse 11

Original

हरिशचन्द्र नृप नारि बिकानी आपहुं भरे डोम घर पानी तैसे नल पर दशा सिरानी भूंजी-मीन कूद गई पानी

Verse 12

Original

श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई पारवती को सती कराई तनिक विलोकत ही करि रीसा नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा

Verse 13

Original

पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी बची द्रौपदी होति उघारी कौरव के भी गति मति मारयो युद्ध महाभारत करि डारयो

Verse 14

Original

रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला लेकर कूदि परयो पाताला शेष देव-लखि विनती लाई रवि को मुख ते दियो छुड़ाई

Verse 15

Original

वाहन प्रभु के सात सुजाना भय दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना जम्बुक सिंह आदि नग धारी सो फल ज्योतिष कहत पुकारी

Verse 16

Original

गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं हय ते सुख सम्पति उपजावैं गर्दभ हानि करै बहु काजा सिंह सिद्धकर राज समाजा

Verse 17

Original

जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै मृग दे कष्ट प्राण संहारै जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी चोरी आदि होय डर भारी

Verse 18

Original

तैसहि चारि चरण यह नामा स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा लौह चरण पर जब प्रभु आवैं धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं

Verse 19

Original

समता ताम्र रजत शुभकारी स्वर्ण सर्व सुख मंगल भारी जो यह शनि चरित्र नित गावै कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै

Verse 20

Original

अद्भुत नाथ दिखावैं लीला करैं शत्रु के नशि बलि ढीला जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई विधिवत शनि ग्रह शांति कराई

Verse 21

Original

पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत दीप दान दै बहु सुख पावत कहत राम सुन्दर प्रभु दासा शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा

Verse 22

Original

पाठ शनिश्चर देव को कियो भक्त तैयार करत पाठ चालीस दिन हो भवसागर पार हो भवसागर पार

Sanjeevani Bhelande

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