Aarti Kunj Bihari Ki
Complete lyrics with original text, transliteration, and meaning, 17 sections
Original
आरती कुंज बिहारी की श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की (आरती कुंज बिहारी की) (श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की, जय हो)
Verse 2
Original
आरती कुंज बिहारी की श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की (आरती कुंज बिहारी की) (श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की)
Verse 3
Original
गले में वैजंती माला बजावे मुरली मधुर बाला श्रवण में कुण्डल झलकाला नंद के आनंद नंदलाला
Verse 4
Original
गगन सम अंग कांति काली राधिका चमक रही आली रतन में ठाढ़े बनमाली
Verse 5
Original
भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक चंद्र सी झलक ललित छवि श्यामा प्यारी की श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की
(आरती कुंज बिहारी की)
Original
(श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की) (आरती कुंज बिहारी की) (श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की, जय हो)
Verse 7
Original
कनकमय मोर मुकुट बिलसे देवता दर्शन को तरसे गगन सों सुमन रासि बरसे
Verse 8
Original
बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग ग्वालिनी संग अतुल रति गोप कुमारी की श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की
(आरती कुंज बिहारी की)
Original
(श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की) (आरती कुंज बिहारी की) (श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की)
Verse 10
Original
जहाँ से प्रगट भई गंगा कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा स्मरन ते होत मोह भंगा
Verse 11
Original
बसी शिव शीश, जटा के बीच हरे अघ कीच चरन छवि श्रीबनवारी की श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की
(आरती कुंजबिहारी की)
Original
(श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की, जय हो) (आरती कुंजबिहारी की) (श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की)
Verse 13
Original
चमकती उज्ज्वल तट रेनु बज रही वृंदावन बेनु चहुँ दिसि गोपि काल धेनु
Verse 14
Original
हँसत मृदु मंद, चाँदनी चंद कटत भव फंद टेर सुन दीन भिखारी की श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की
(आरती कुंज बिहारी की)
Original
(श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की, जय हो) (आरती कुंज बिहारी की) (श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की)
(आरती कुंज बिहारी की)
Original
(श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की) (आरती कुंज बिहारी की, जय हो) (श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की)
(आरती कुंज बिहारी की)
Original
(श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की) (आरती कुंज बिहारी की) (श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की)