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Jai Santoshi Mata

Artist: Anuradha Paudwal

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Jai Santoshi Mata

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Lyrics with Meaning

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Original

जय सन्तोषी माता मैया, सन्तोषी माता अपने सेवक जन की अपने सेवक जन की सुख सम्पति दाता जय सन्तोषी माता

(जय सन्तोषी माता)

Original

(मैया, सन्तोषी माता) (अपने सेवक जन की) (अपने सेवक जन की) (सुख सम्पति दाता) (जय सन्तोषी माता)

Verse 3

Original

सुन्दर चीर सुनहरी, माँ धारण कीन्हो (मैया, धारण कीन्हो) हीरा पन्ना दमके (हीरा पन्ना दमके) तन श्रृंगार लीन्हो (जय सन्तोषी माता)

Verse 4

Original

गेरू लाल छटा छबि, बदन कमल सोहे (मैया, बदन कमल सोहे) मंद हँसत करुणामयी (मंद हँसत करुणामयी) त्रिभुवन मन मोहे (जय सन्तोषी माता)

Verse 5

Original

स्वर्ण सिंहासन बैठी, चंवर दुरे प्यारे (मैया, चंवर दुरे प्यारे) धूप, दीप, मधु, मेवा (धूप, दीप, मधु, मेवा) भोग धरे न्यारे (जय सन्तोषी माता)

Verse 6

Original

गुड़ और चना परम प्रिय, तामें संतोष किए (मैया, तामें संतोष किए) संतोषी कहलाई (संतोषी कहलाई) भक्तन विभव दिए (जय सन्तोषी माता)

Verse 7

Original

शुक्रवार प्रिय मानती, आज दिवस सोही (मैया, आज दिवस सोही) भक्त मंडली छाई (भक्त मंडली छाई) कथा सुनत मोही (जय सन्तोषी माता)

Verse 8

Original

मंदिर जग-मग ज्योति, मंगल ध्वनि छाई (मैया, मंगल ध्वनि छाई) विनय करें हम सेवक (विनय करें हम सेवक) चरनन सिर नाई (जय सन्तोषी माता)

Verse 9

Original

भक्ति भावमय पूजा, अंगीकृत कीजै (मैया, अंगीकृत कीजै) जो मन बसे हमारे (जो मन बसे हमारे) इच्छित फल दीजै (जय सन्तोषी माता)

Verse 10

Original

दुखी, दरिद्री, रोगी संकट मुक्त किए (मैया, संकट मुक्त किए) बहु धन-धान्य भरे घर (बहु धन-धान्य भरे घर) सुख सौभाग्य दिए (जय सन्तोषी माता)

Verse 11

Original

ध्यान धरे जन तेरा, मन वांछित फल पायो (मन वांछित फल पायो) पूजा, कथा, श्रवण कर (पूजा, कथा, श्रवण कर) घर आनंद आयो (जय सन्तोषी माता)

Verse 12

Original

शरण गहे की लज्जा, रखियो जगदम्बे (मैया, रखियो जगदम्बे) संकट तू ही निवारे (संकट तू ही निवारे) दयामयी अम्बे (जय सन्तोषी माता)

Verse 13

Original

शुक्रवार प्रिय मानती, आज दिवस सोही (मैया, आज दिवस सोही) भक्त मंडली छाई (भक्त मंडली छाई) कथा सुनत मोही (जय सन्तोषी माता)

Verse 14

Original

सन्तोषी माता की आरती, जो कोई जन गावे (मैया, जो कोई जन गावे) रिद्धि-सिद्धि सुख सम्पति (रिद्धि-सिद्धि सुख सम्पति) जी-भर के पावे (जय सन्तोषी माता)

Verse 15

Original

जय सन्तोषी माता मैया, सन्तोषी माता अपने सेवक जन की अपने सेवक जन की सुख सम्पति दाता जय सन्तोषी माता

(जय सन्तोषी माता)

Original

(मैया, सन्तोषी माता) (अपने सेवक जन की) (अपने सेवक जन की) (सुख सम्पति दाता) (जय सन्तोषी माता)

Anuradha Paudwal

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