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Krishna bhakti

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Krishna bhakti

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Lyrics with Meaning

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Original

"कृष्ण-कृष्ण" दिन-रात जपो, रोम-रोम में श्याम बंसी वाले साँवरिया, हम हैं तेरे गुलाम

Verse 2

Original

धन्य है बृजभूमि, जहाँ कृष्ण लिए अवतार बृज की धूल चंदन बनी, जहाँ खेले नंद कुमार

Verse 3

Original

साँवरी मूरत कान्हा की जो देखे इक बार प्रेम-दीवाना हो जाए मन, सुख मिल जाए अपार

Verse 4

Original

श्याम-सुंदर, बंसीधर, मुरली मधुर बजाए सारी सुद-बुद भूल के, मन श्याम नाम गुण गाए

Verse 5

Original

श्याम-रूप राधा बनी, राधा बन गए श्याम दोनों मिलकर एक हुए, प्रेम-रंग सुख धाम

Verse 6

Original

माधव जग के मूल हैं, श्री हरि के अवतार वृंदावन के नाथ हैं जग के पालनहार

Verse 7

Original

श्रीमद्भगवद्गीता है सब शास्त्रों का सार जिसको गीता ज्ञान मिले, हो जाए भव पार

Verse 8

Original

हर-पल जीवन घट रहा, समय बड़ा अनमोल कृष्ण-भक्ति में डूब के "राधे-राधे" बोल

Verse 9

Original

(राधे-कृष्णा, राधे-कृष्णा) (कृष्णा-कृष्णा, राधे-राधे)

Verse 10

Original

गल वैजयन्ती माला सोहे, रूप साँवरा मन को मोहे मोर-मुकुट सुंदर है सिर पर, (कर कंगन, ओढ़े पीतांबर)

Verse 11

Original

कानन कुंडल, हाथ लकुटिया, पैरों में बाजे पैंजनिया सुंदर बाँकी है मुस्कनिया, (मनमोहन है कृष्ण-कन्हैया)

Verse 12

Original

देवकी और वसुदेव के नंदन, मथुरा में जन्में जगवंदन कारागृह से गोकुल आए, (नंद-यशोदा अति हर्षाएँ)

Verse 13

Original

संग खेले बलरामा भैया, झूला झुलाए यशोदा मैया जमुना तट पर मुरली बजाए, (सब गोपिन्ह के वस्त्र चुराएँ)

Verse 14

Original

बृज में माखन खूब चुराया, गोपियों ने खूब नचाया राधा के संग रास रचाएँ, (कुंज वनों में धेनु चराएँ)

Verse 15

Original

इंद्र किए जब वर्षा भारी, कृष्ण बने गोवर्धन-धारी नाग नथाया कालीदह पर, (सर्प के फण पर नाचें नटवर)

Verse 16

Original

दुर्जन पाप करें धरती पर, श्री हरि आएँ कृष्ण जी बनकर पूतन और बकासुर मारे, ("जय, जय कृष्ण" के हो जयकारें)

Verse 17

Original

बाल कृष्ण लीला करें, छोटे से नंदलाल यदुकुल-भूषण कृष्ण बने, दुष्ट कंस के काल

Verse 18

Original

(राधे-कृष्णा, राधे-कृष्णा) (कृष्णा-कृष्णा, राधे-राधे)

Verse 19

Original

द्वापर युग में मदन-मुरारी, १६ कला पूर्ण अवतारी द्वारिकापुरी धाम बनाया, (रुक्मिणी के संग ब्याह रचाया) (श्री कृष्णः शरणम्)

Verse 20

Original

केशव ही अर्जुन के साथी, महाभारत में बने सारथी गीता ज्ञान सिखाने वाले, (विश्वरूप दर्शाने वाले) (श्री कृष्णः शरणम्)

Verse 21

Original

द्रौपदी जब प्रभु-शरण में आई, भरी सभा में लाज बचाई मीरा पी गई ज़हर का प्याला, (विष अमृत कर किया उजाला) (श्री कृष्णः शरणम्)

Verse 22

Original

मित्र सुदामा के बन आए, नरसी जी का मान बढ़ाए सूरदास हरि-भजन सुनाएँ, (तुकाराम विट्ठल गुण गाएँ) (श्री कृष्णः शरणम्)

Verse 23

Original

जगन्नाथ, जय बद्री विशाला, तिरुपति बालाजी, गोपाला वृंदावन के बाँके-बिहारी, (जय हो, द्वारिकाधीश मुरारी) (श्री कृष्णः शरणम्)

Verse 24

Original

प्राण जाए जमुना तट पर, कृष्ण-चरण हो पास मुख में प्रभु का नाम हो, पूरी हो यह आस

Verse 25

Original

(राधे-कृष्णा, राधे-कृष्णा) (कृष्णा-कृष्णा, राधे-राधे)

Verse 26

Original

(राधे-कृष्णा, राधे-कृष्णा) (कृष्णा-कृष्णा, राधे-राधे)

Anuradha Paudwal

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