Ganesh Chalisa
Complete lyrics with original text, transliteration, and meaning, 42 sections
Ganesh Chalisa
Original
जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल
Verse 2
Original
ओ, जय जय जय गणपति गणराजू मंगल भरण करण शुभः काजू (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)
Verse 3
Original
ओ, जै गजबदन सदन सुखदाता विश्व विनायका बुद्धि विधाता (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)
Verse 4
Original
ओ, वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावन तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)
Verse 5
Original
ओ, राजत मणि मुक्तन उर माला स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)
Verse 6
Original
ओ, पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं मोदक भोग सुगन्धित फूलं (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)
Verse 7
Original
ओ, सुन्दर पीताम्बर तन साजित चरण पादुका मुनि मन राजित (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)
Verse 8
Original
ओ, धनि शिव सुवन षडानन भ्राता गौरी लालन विश्व-विख्याता (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)
Verse 9
Original
ओ, ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे मूषक वाहन सोहत द्वारे (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)
Verse 10
Original
कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी अति शुची पावन मंगलकारी (श्री गणेशाय नमः)
Verse 11
Original
एक समय गिरिराज कुमारी पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी (श्री गणेशाय नमः)
Verse 12
Original
भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा (श्री गणेशाय नमः)
Verse 13
Original
अतिथि जानी के गौरी सुखारी बहुविधि सेवा करी तुम्हारी (श्री गणेशाय नमः)
Verse 14
Original
अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा (श्री गणेशाय नमः)
Verse 15
Original
मिलहि पुत्र तुहि बुद्धि विशाला बिना गर्भ धारण यहि काला (श्री गणेशाय नमः)
Verse 16
Original
गणनायक गुण ज्ञान निधाना पूजित प्रथम रूप भगवाना (श्री गणेशाय नमः)
Verse 17
Original
अस कही द्विज भयो अन्तर्धाना बाल रूप पलना पर आना
Verse 18
Original
ओ, बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)
Verse 19
Original
ओ, सकल भुवन, मुदमंगल गावहिं नभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)
Verse 20
Original
शम्भु, उमा... शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)
Verse 21
Original
ओ, लखि अति आनन्द मंगल साजा छवि देखन आये शनि राजा (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)
Verse 22
Original
ओ, निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं बालक देखन चाहत नाहीं (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)
Verse 23
Original
ओ, गिरिजा कछु मन भेद बढायो उत्सव मोर न शनि तुही भायो (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)
Verse 24
Original
कहन लगे... कहन लगे शनि, मन सकुचाई का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)
Verse 25
Original
ओ, नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ शनि सों बालक देखन कहयऊ (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)
Verse 26
Original
पड़तहिं शनि दृग कोण प्रकाशा बालक सिर उड़ि गयो अकाशा (श्री गणेशाय नमः)
Verse 27
Original
गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी (श्री गणेशाय नमः)
Verse 28
Original
हाहाकार मच्यौ कैलाशा शनि कीन्हों लखि सुत का नाशा (श्री गणेशाय नमः)
Verse 29
Original
तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो काटी चक्र सो गज सिर लाये (श्री गणेशाय नमः)
Verse 30
Original
बालक के धड़ ऊपर धारयो प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो (श्री गणेशाय नमः)
Verse 31
Original
नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे प्रथम पूज्य बुद्धि निधि वर दीन्हे (श्री गणेशाय नमः)
Verse 32
Original
बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा (श्री गणेशाय नमः)
Verse 33
Original
चले षडानन भरमि भुलाई रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई
Verse 34
Original
ओ, चरण मातु-पितु के धर लीन्हें तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)
Verse 35
Original
ओ, धनि गणेश कही शिव हिये हरषे नभ ते सुरन सुमन बरससाए (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)
Verse 36
Original
ओ, तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई शेष सहसमुख सके न गाई (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)
Verse 37
Original
ओ, मैं मतिहीन मलीन दुखारी करहूँ कौन विधि विनय तुम्हारी (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)
Verse 38
Original
ओ, भजत रामसुन्दर प्रभुदासा लग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)
Verse 39
Original
ओ, अब प्रभु दया दीन पर कीजै अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)
Verse 40
Original
श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करै धर ध्यान नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सन्मान
Verse 41
Original
चालीसा विघ्नेश का रचयो रामसु कवीन्द्र भक्ति सहित गायन कियो गणपति दास रवीन्द्र
(मंगल मूल सघन सुख धाम)
Original
(विघ्न विनाशक गणपति नाम) (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)