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Ganesh Chalisa

Complete lyrics with original text, transliteration, and meaning, 42 sections

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Ganesh Chalisa

Sadhna Sargam10:16chalisa

Original

जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल

Verse 2

Original

ओ, जय जय जय गणपति गणराजू मंगल भरण करण शुभः काजू (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)

Verse 3

Original

ओ, जै गजबदन सदन सुखदाता विश्व विनायका बुद्धि विधाता (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)

Verse 4

Original

ओ, वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावन तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)

Verse 5

Original

ओ, राजत मणि मुक्तन उर माला स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)

Verse 6

Original

ओ, पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं मोदक भोग सुगन्धित फूलं (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)

Verse 7

Original

ओ, सुन्दर पीताम्बर तन साजित चरण पादुका मुनि मन राजित (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)

Verse 8

Original

ओ, धनि शिव सुवन षडानन भ्राता गौरी लालन विश्व-विख्याता (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)

Verse 9

Original

ओ, ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे मूषक वाहन सोहत द्वारे (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)

Verse 10

Original

कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी अति शुची पावन मंगलकारी (श्री गणेशाय नमः)

Verse 11

Original

एक समय गिरिराज कुमारी पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी (श्री गणेशाय नमः)

Verse 12

Original

भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा (श्री गणेशाय नमः)

Verse 13

Original

अतिथि जानी के गौरी सुखारी बहुविधि सेवा करी तुम्हारी (श्री गणेशाय नमः)

Verse 14

Original

अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा (श्री गणेशाय नमः)

Verse 15

Original

मिलहि पुत्र तुहि बुद्धि विशाला बिना गर्भ धारण यहि काला (श्री गणेशाय नमः)

Verse 16

Original

गणनायक गुण ज्ञान निधाना पूजित प्रथम रूप भगवाना (श्री गणेशाय नमः)

Verse 17

Original

अस कही द्विज भयो अन्तर्धाना बाल रूप पलना पर आना

Verse 18

Original

ओ, बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)

Verse 19

Original

ओ, सकल भुवन, मुदमंगल गावहिं नभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)

Verse 20

Original

शम्भु, उमा... शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)

Verse 21

Original

ओ, लखि अति आनन्द मंगल साजा छवि देखन आये शनि राजा (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)

Verse 22

Original

ओ, निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं बालक देखन चाहत नाहीं (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)

Verse 23

Original

ओ, गिरिजा कछु मन भेद बढायो उत्सव मोर न शनि तुही भायो (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)

Verse 24

Original

कहन लगे... कहन लगे शनि, मन सकुचाई का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)

Verse 25

Original

ओ, नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ शनि सों बालक देखन कहयऊ (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)

Verse 26

Original

पड़तहिं शनि दृग कोण प्रकाशा बालक सिर उड़ि गयो अकाशा (श्री गणेशाय नमः)

Verse 27

Original

गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी (श्री गणेशाय नमः)

Verse 28

Original

हाहाकार मच्यौ कैलाशा शनि कीन्हों लखि सुत का नाशा (श्री गणेशाय नमः)

Verse 29

Original

तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो काटी चक्र सो गज सिर लाये (श्री गणेशाय नमः)

Verse 30

Original

बालक के धड़ ऊपर धारयो प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो (श्री गणेशाय नमः)

Verse 31

Original

नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे प्रथम पूज्य बुद्धि निधि वर दीन्हे (श्री गणेशाय नमः)

Verse 32

Original

बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा (श्री गणेशाय नमः)

Verse 33

Original

चले षडानन भरमि भुलाई रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई

Verse 34

Original

ओ, चरण मातु-पितु के धर लीन्हें तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)

Verse 35

Original

ओ, धनि गणेश कही शिव हिये हरषे नभ ते सुरन सुमन बरससाए (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)

Verse 36

Original

ओ, तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई शेष सहसमुख सके न गाई (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)

Verse 37

Original

ओ, मैं मतिहीन मलीन दुखारी करहूँ कौन विधि विनय तुम्हारी (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)

Verse 38

Original

ओ, भजत रामसुन्दर प्रभुदासा लग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)

Verse 39

Original

ओ, अब प्रभु दया दीन पर कीजै अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)

Verse 40

Original

श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करै धर ध्यान नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सन्मान

Verse 41

Original

चालीसा विघ्नेश का रचयो रामसु कवीन्द्र भक्ति सहित गायन कियो गणपति दास रवीन्द्र

(मंगल मूल सघन सुख धाम)

Original

(विघ्न विनाशक गणपति नाम) (मंगल मूल सघन सुख धाम) (विघ्न विनाशक गणपति नाम)

Ravindra Jain

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