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Lakshmi Chalisa

Complete lyrics with original text, transliteration, and meaning, 52 sections

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Lakshmi Chalisa

Shreya Ghoshal12:38chalisa

Original

मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास मनो कामना सिद्ध करि, पुरवहु मेरी आस

Verse 2

Original

सिन्धु सुता मैं सुमिरौं तोही ज्ञान बुद्धि विद्या दो मोहि

Verse 3

Original

तुम समान नहिं कोई उपकारी सब विधि पुरबहु आस हमारी

(जय, जय, जय लक्ष्मी माता)

Original

(तुम ही सुख-संपत्ति दाता) (जय, जय, जय लक्ष्मी माता) (तुम ही सुख-संपत्ति दाता)

Verse 5

Original

जै जै जगत जननि जगदम्बा सबकि तुमही हो अवलम्बा

Verse 6

Original

तुम ही हो सब घट घट कि वासी विनती यही हमारी खासी

Verse 7

Original

जग जननी जय सिन्धु कुमारी दीनन की तुम हो हितकारी

Verse 8

Original

विनवौं नित्य तुमहिं महारानी कृपा करौ जग जननि भवानी

Verse 9

Original

केहि विधि स्तुति करौं तिहारी सुधि लीजै अपराध बिसारी

Verse 10

Original

कृपा दृष्टि चितवो मम ओरी जगत जननि विनती सुन मोरी

Verse 11

Original

ज्ञान बुद्धि जय सुख की दाता संकट हरो हमारी माता

(जय, जय, जय लक्ष्मी माता)

Original

(तुम ही सुख-संपत्ति दाता) (जय, जय, जय लक्ष्मी माता) (तुम ही सुख-संपत्ति दाता)

Verse 13

Original

क्षीर सिंधु जब विष्णु मथायो १४ रत्न सिंधु में पायो

Verse 14

Original

१४ रत्न में तुम सुखरासी सेवा कियो प्रभुहिं बनि दासी

Verse 15

Original

जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा रूप बदल तहं सेवा कीन्हा

Verse 16

Original

स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा

Verse 17

Original

तब तुम प्रकट जनकपुरि माहीं सेवा कियो हृदय पुलकाहीं

Verse 18

Original

अपनाया तोहि अन्तर्यामी विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी

Verse 19

Original

तुम सब प्रबल शक्ति नहिं आनी कहँ तक महिमा कहौं बखानी

(जय, जय, जय लक्ष्मी माता)

Original

(तुम ही सुख-संपत्ति दाता) (जय, जय, जय लक्ष्मी माता) (तुम ही सुख-संपत्ति दाता)

Verse 21

Original

मन कर्म वचन करै सेवकाई मन इच्छित वांछित फल पाई

Verse 22

Original

तजि छल कपट और चतुराई पूजहिं विविध भाँति मन लाई

Verse 23

Original

और हाल मैं कहौं बुझाई जो यह पाठ करे मन लाई

Verse 24

Original

ताको कोई कष्ट न होई मन इच्छित फल पावै फल सोई

Verse 25

Original

त्राहि-त्राहि जय दुःख निवारिणी त्रिविध ताप भव बंधन हारिणि

Verse 26

Original

जो यह चालीसा पढ़े-पढ़ावे ध्यान लगाकर सुने-सुनावै

Verse 27

Original

ताको कोई न रोग सतावै पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै

(जय, जय, जय लक्ष्मी माता)

Original

(तुम ही सुख-संपत्ति दाता) (जय, जय, जय लक्ष्मी माता) (तुम ही सुख-संपत्ति दाता)

Verse 29

Original

पुत्र हीन और सम्पत्ति हीना अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना

Verse 30

Original

विप्र बुलाय कै पाठ करावै शंका दिल में कभी न लावै

Verse 31

Original

पाठ करावै दिन चालीसा ता पर कृपा करें गौरीसा

Verse 32

Original

सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै कमी नहीं काहू की आवै

Verse 33

Original

१२ मास करे जो पूजा तेहि सम धन्य और नहिं दूजा

Verse 34

Original

प्रतिदिन पाठ करै मन माहीं उन सम कोई जग में कहु नाहिं

Verse 35

Original

बहु विधि क्या मैं करौं बड़ाई लेय परीक्षा ध्यान लगाई

(जय, जय, जय लक्ष्मी माता)

Original

(तुम ही सुख-संपत्ति दाता) (जय, जय, जय लक्ष्मी माता) (तुम ही सुख-संपत्ति दाता)

Verse 37

Original

करि विश्वास करैं व्रत नेमा होय सिद्ध उपजै उर प्रेमा

Verse 38

Original

जय जय जय लक्ष्मी भवानी सब में व्यापित हो गुण खानी

Verse 39

Original

तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं तुम सम कोउ दयाल कहूँ नाहीं

Verse 40

Original

मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै संकट काटि भक्ति मोहि दीजे

Verse 41

Original

भूल चूक करी क्षमा हमारी दर्शन दीजै दशा निहारी

Verse 42

Original

बिन दरशन व्याकुल अधिकारी तुमहिं अक्षत दुःख सहते भारी

Verse 43

Original

नहिं मोहिं ज्ञान बुद्धि है तन में सब जानत हो अपने मन में

Verse 44

Original

रूप चतुर्भुज करके धारण कष्ट मोरे अब करहु निवारण

Verse 45

Original

रूप चतुर्भुज करके धारण कष्ट मोरे अब करहु निवारण

Verse 46

Original

कहि प्रकार मैं करौं बड़ाई ज्ञान बुद्धि मोहिं नहिं अधिकाई

Verse 47

Original

कहि प्रकार मैं करौं बड़ाई ज्ञान बुद्धि मोहिं नहिं अधिकाई

(जय, जय, जय लक्ष्मी माता)

Original

(तुम ही सुख-संपत्ति दाता) (जय, जय, जय लक्ष्मी माता) (तुम ही सुख-संपत्ति दाता) त्राहि त्राहि दुख हारिणी

(जय, जय, जय लक्ष्मी माता)

Original

(तुम ही सुख-संपत्ति दाता) हरो वेगि सब त्रास (जय, जय, जय लक्ष्मी माता) (तुम ही सुख-संपत्ति दाता)

Verse 50

Original

(जय, जय, जय लक्ष्मी माता) जयति जयति जय लक्ष्मी (तुम ही सुख-संपत्ति दाता) (जय, जय, जय लक्ष्मी माता) (तुम ही सुख-संपत्ति दाता) करो शत्रु को नाश

(जय, जय, जय लक्ष्मी माता)

Original

(तुम ही सुख-संपत्ति दाता) (जय, जय, जय लक्ष्मी माता) (तुम ही सुख-संपत्ति दाता)

(जय, जय, जय लक्ष्मी माता)

Original

(तुम ही सुख-संपत्ति दाता) (जय, जय, जय लक्ष्मी माता) (तुम ही सुख-संपत्ति दाता)

Rattan Mohan Sharma

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