Lord Shiva (Trimbakeshwar), Lord Vishnu (Narayan)otherlyrics

Narayan

Complete lyrics with original text, transliteration, and meaning, 32 sections

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Narayan

Narciother

Original

जय नारायण स्वामी, नारायण जय नारायण

Verse 2

Original

अलख निरंजन, भवभय भंजन जनमन रंजन दाता (जनमन रंजन दाता) हमें शरण दे अपने चरण में कर निर्भय जगत्राता (कर निर्भय जगत्राता)

Verse 3

Original

तूने लाखों की नैया तारी-तारी, हरि-हरि (जय-जय, नारायण-नारायण, हरि-हरि) (स्वामी, नारायण-नारायण, हरि-हरि) तेरी लीला सब से न्यारी-न्यारी, हरि-हरि (तेरी लीला सब से न्यारी-न्यारी, हरि-हरि) तेरी महिमा, प्रभु, है प्यारी-प्यारी, हरि-हरि

Verse 4

Original

पिता थे कश्यप और दिति थी माँ हरि का वैरी था, सुनो वो नाम हिरण्यकश्यप था राजा घमंडी स्वयं को कहता था बस, "भगवान"

Verse 5

Original

ब्रह्मा का तप था किया कठोर देवों ने उसको था रोका बहुत आँधी भी भेजी और भेजा तूफ़ान पर रुके ना उसके होंठों के बोल

Verse 6

Original

तप का भाव था उसका अटल देवों ने रोका पर रहा अचल ज़ोर था ऐसा उसकी अटलता में ब्रह्मा भी पहुँचे फिर देने को वर

Verse 7

Original

आँखें खुली तो माँगा ये वर ना पशु, आदमी छू सके सर शस्त्र कोई मुझे छू ना सके अस्त्र भी हो मेरे आगे विफल

Verse 8

Original

दिन में मरूँ, ना रात में ना स्थल पे, ना आकाश में देव, असुर ना करें प्रहार ना भीतर मरूँ, ना मरूँ बाहर

Verse 9

Original

रात लिखी ना मौत हो ना दिन में भी कोई ले मेरे प्राण मार सके ना कोई गंधर्व अमर रहे बस मेरी ये शान

Verse 10

Original

पा के ये वर था चढ़ा अहम हर प्राणी था जाता उससे सहम मार सके ना कोई उसे बस यही था पाला झूठा वहम

Verse 11

Original

पापों को धरती ना करती सहन पापी पे हरि ना करते रहम आते हैं स्वयं प्रभु धरा में करने को भंग पापी वहम

Verse 12

Original

प्रभु के नाम का पारस जो छू ले वो हो जाए सोना (वो हो जाए सोना) दो अक्षर का शब्द "हरि" है लेकिन बड़ा सलोना (लेकिन बड़ा सलोना)

Verse 13

Original

तूने लाखों की नैया तारी-तारी, हरि-हरि (जय-जय, नारायण-नारायण, हरि-हरि) (स्वामी, नारायण-नारायण, हरि-हरि) तेरी लीला सब से न्यारी-न्यारी, हरि-हरि (तेरी लीला सब से न्यारी-न्यारी, हरि-हरि) तेरी महिमा, प्रभु, है प्यारी-प्यारी, हरि-हरि

Verse 14

Original

राजा ना था वो शख़्स हरि का उसे ना भाता था अक्स हरि का जहाँ था हरि का नाम निषेध वहीं पे जन्मा था भक्त हरि का

Verse 15

Original

नाम उसका था प्रह्लाद हरि की स्तुती का उसमें था भाग जहाँ पे रहते सभी असुर हरि का नाम वहाँ गया था जाग

Verse 16

Original

पता लगा जो, खौला था रक्त बेटा था उसका हरि का भक्त किया था बेटे को वैसे सचेत रोक नाम ये, इसी तू वक़्त

Verse 17

Original

बेटा तो गाता पर हरि का छंद देख उसे हुआ पिता प्रचंड कुछ भी ना सूझी तो कर बैठा तय कि बेटे को देगा मृत्यु का दंड

Verse 18

Original

कारागार में फेंका उसे जहाँ चारों तरफ़ वे सर्प बिछे लीला हरि की बड़ी अजब ना सर्प उसे थे छू भी सके

Verse 19

Original

दिया था विष और खाई से फैंका था राजा के कर्मों को हरि ने देखा था कैसे भला उसे मौत छुए हरि की छाया में राजा का बेटा था

Verse 20

Original

उसको मिला था वर भी अजीब लपटें ना छुएगी उसका शरीर नाम होलिका था (ha-ha) प्रह्लाद को गोद पे ले बैठी फिर

Verse 21

Original

ज्वाला में बैठी, ना डरी ज़रा हरि नाम का जादू चला प्रह्लाद को ना हानी हुई ख़ुद को वो बैठी पर पूरी जला

Verse 22

Original

मन में सोचा तो ये जाना बिन तेरे यहाँ पर कोई ना सगा, कोई ना सगा (बिन तेरे यहाँ पर कोई ना सगा, कोई ना सगा) हम तुझपे जाएँ वारी-वा-

Verse 23

Original

क्रोध की ज्वाला थी भारी जली ज्वाला में छाती थी सारी जाली पूछा था बेटे से होके ख़फ़ा "कहाँ पे रहता है तेरा हरि?"

Verse 24

Original

बोला प्रह्लाद रख के सबर सारे ही स्थानों को उनकी ख़बर "हरि दिखाएँगे चारों तरफ़ प्यार से देखे जो भक्ति नज़र"

Verse 25

Original

यदी इस खंभे में भी तेरा भगवान है तो आज, ना ये खंभा रहेगा, ना तेरा भगवान

Verse 26

Original

खंभा जो टूटा तो फेला था डर सुनी दहाड़ जो, काँपा था स्थल भारी से हाथों में पंजे थे पैने धड़ था नर का, शेर का सर

Verse 27

Original

मौन हुए सब, मरे थे शब्द सभा में सब गए पीछे थे हट गए नरसिंह बन के पहुँचे हरि हिरण्यकश्यप का करने को वध

Verse 28

Original

हरि की गोद, उसका वज़न पापी जो कहता था, "मैं हूँ अमर" बोले वो, "कर तू याद ज़रा ब्रह्म से माँगा था तूने क्या वर?"

Verse 29

Original

पेट पे पंजे रखते ही, मानो, प्राण थे उसके आते बाहर गाड़े जो पंजे तो पीड़ा से उसकी दोनों ही थी आँखें बाहर पंजों से चीरा था माँस हरि ने, रक्त बहा था जैसे प्रपात काँपे थे लोग ये देख घड़ी, चीखों के साथ ही आते बाहर

Verse 30

Original

पंजों पे ख़ून, स्वर में गर्जन, आँखों में क्रोध और नुकीले दाँत हरि जो रहते थे सदा ही शांत, उनमें भरी थी क्रोध की आग गया प्रह्लाद पास प्रभु के, पास बिठाया उसे हरि ने उनका आराधक ही कर सकता है हरि को शांत

(जय-जय, नारायण-नारायण, हरि-हरि)

Original

(स्वामी, नारायण-नारायण, हरि-हरि) तेरी लीला सब से न्यारी-न्यारी, हरि-हरि (तेरी लीला सब से न्यारी-न्यारी, हरि-हरि) तेरी महिमा, प्रभु, है प्यारी-प्यारी, हरि-हरि

Verse 32

Original

जय नारायण जीभ हरि नाम नहीं छोड़ सकती

Narci

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