Nakshatra
Complete lyrics with original text, transliteration, and meaning, 7 sections
Nakshatra
Verse 1
Original
नक्षत्र नक्षत्र यंग किंग ना मिला प्यार उसे घर से सपने थे पुर करने सफ़र पे डरके नही जीना और उसे डरके तरसे अधूरा मन उसका भटके
Verse 2
Original
जाई शिव शंकर कभी ना मिते ये hunger 800 crore लोग आपके दर्शक हूँ मई मंच पर दृष्टिकोण बदल कर जब ज़िंदगी देखी नापतोल के खुशनसीब अपनी आदतों से वनवास लिया जाके बादलों मे
Verse 3
Original
हरी ओम मुसाफिर घूमे खाली गलियों मे सदियो से थे जो गुमराह नापते नक्शे जो थे नदियों से अपहिल मुलाकात हुई सच से सच ये सुनो सत्संग मेरा सर्दियों मे नक्षत्र नक्षत्र
Verse 4
Original
नक्षत्र नक्षत्र हो गया मै मुक्त अब प्राप्त किया मैने मोक्ष कहानी मेरी लिखी मैने जो प्राप्त किया मैने मोक्ष
Verse 5
Original
हो गया मै मुक्त अब प्राप्त किया मैने मोक्ष कहानी मेरी लिखी मैने जो प्राप्त किया मैने मोक्ष बचपन की मुल्तान की बात है पारटिशन हो गया लुक्कणोव चला गया
Verse 6
Original
बढ़ी महनतें करनी पढ़ी पहले पैसा कहाँ होता था सही बात है शान मारने से कुछ नही होता असलियत बताने से होता है अछा तो माहटें करी और ग़रीबी मिटी खाने पीने के लायक हुए
Verse 7
Original
मा हमारी कहती थी देखो बिस्तरा छ्चोड़ते हो तो सालो कुछ खाने को मिलता है
