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Shiv Chalisa

Complete lyrics with original text, transliteration, and meaning, 23 sections

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Shiv Chalisa

Ravindra Sathe17:06chalisa

Original

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान

Verse 2

Original

जय गिरिजा पति दीन दयाला सदा करत सन्तन प्रतिपाला भाल चन्द्रमा सोहत नीके कानन कुण्डल नागफनी के

Verse 3

Original

अंग गौर शिर गंग बहाये मुण्डमाल तन क्षार लगाए वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे छवि को देखि नाग मन मोहे

Verse 4

Original

मैना मातु की हवे दुलारी वाम अंग सोहत छवि न्यारी कर त्रिशूल सोहत छवि भारी करत सदा शत्रुन क्षयकारी

Verse 5

Original

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे सागर मध्य कमल हैं जैसे कार्तिक श्याम और गणराऊ या छवि को कहि जात न काऊ

Verse 6

Original

देवन जबहीं जाय पुकारा तब ही दुख प्रभु आप निवारा कियो उपद्रव तारक भारी देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी

Verse 7

Original

तुरत षडानन आप पठायउ लवनिमेष महँ मारि गिरायउ आप जलंधर असुर संहारा सुयश तुम्हार विदित संसारा

Verse 8

Original

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई सबहिं कृपा कर लीन बचाई किया तपहिं भागीरथ भारी पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी

Verse 9

Original

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं सेवक स्तुति करत सदाहीं वेद नाम महिमा तव गाई अकथ अनादि भेद नहिं पाई

Verse 10

Original

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला जरत सुरासुर भए विहाला कीन्ही दया तहं करी सहाई नीलकण्ठ तब नाम कहाई

Verse 11

Original

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा जीत के लंक विभीषण दीन्हा सहस कमल में हो रहे धारी कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी

Verse 12

Original

एक कमल प्रभु राखेउ जोई कमल नयन पूजन चहं सोई कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर भए प्रसन्न दिए इच्छित वर

Verse 13

Original

जय जय जय अनन्त अविनाशी करत कृपा सब के घटवासी दुष्ट सकल नित मोहि सतावै भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै

Verse 14

Original

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो यहि अवसर मोहि आन उबारो लै त्रिशूल शत्रुन को मारो संकट से मोहि आन उबारो

Verse 15

Original

मात-पिता भ्राता सब होई संकट में पूछत नहिं कोई स्वामी एक है आस तुम्हारी आय हरहु मम संकट भारी

Verse 16

Original

धन निर्धन को देत सदा हीं जो कोई जांचे सो फल पाहीं अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी क्षमहु नाथ अब चूक हमारी

Verse 17

Original

शंकर हो संकट के नाशन विघ्न विनाशन मंगल कारण योगी यति मुनि ध्यान लगावैं नारद शारद शीश नवावैं

Verse 18

Original

नमो नमो जय नमः शिवाय सुर ब्रह्मादिक पार न पाय जो यह पाठ करे मन लाई ता पर होत है शम्भु सहाई

Verse 19

Original

ॠनियां जो कोई हो अधिकारी पाठ करे सो पावन हारी पुत्र होन कर इच्छा कोई निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई

Verse 20

Original

पण्डित त्रयोदशी को लावे ध्यान पूर्वक होम करावे त्रयोदशी व्रत करै हमेशा तन नहीं ताके रहै कलेशा

Verse 21

Original

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे शंकर सम्मुख पाठ सुनावे जन्म जन्म के पाप नसावे अन्त धाम शिवपुर में पावे

Verse 22

Original

कहत अयोध्यादास आस तुम्हारी जानि सकल दुःख हरहु हमारी कहत अयोध्या पास तुम्हारी जानि सकल दुःख हरहु हमारी

Verse 23

Original

नित्त नेम कर प्रातः ही पाठ करौं चालीस तुम मेरी मनोकामना पूर्ण करो जगदीश

Anup Jalota

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